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जलदस्युओं के क़ब्ज़े में 18 भारतीय
जलदस्यु
सोमालिया के अर्धस्वायत्त तटीय क्षेत्र पुंटलैंड में जलदस्युओं के कारण ख़ूब विकास हुआ है
अफ़्रीकी देश सोमालिया के पास जलदस्युओं ने एक बार फिर एक जहाज़ का अपहरण कर लिया है, जिसमें कई भारतीय सवार थे.

स्टोल्ट वेलर नामक इस जहाज़ में 22 लोग सवार थे जिनमें 18 भारतीय, दो फ़िलीपीनी, एक बांग्लादेशी और एक रूसी नागरिक सवार थे.

हांगकांग के इस जहाज़ पर तेल और केमिकल लदे थे और ये मुंबई जानेवाला था, मगर स्वेज़ नहर पार करते ही अदन की खाड़ी में इसका अपहरण कर लिया गया.

इस क्षेत्र में जहाज़ों के अपहरण की ये पहली घटना नहीं है, इस साल कई बार इस तरह की घटनाएँ हो चुकी हैं.

अदन की खाड़ी एक महत्वपूर्ण समुद्र जलमार्ग है और वहाँ जिसतरह से जहाज़ों के अपहरण की घटनाएँ बढ़ी हैं.

हालते ये है कि अब पिछले एक साल में इस रास्ते से गुज़रनेवाले जहाज़ों के बीमे के लिए कंपनियाँ दस गुना अधिक कीमत माँगने लगी हैं.

पुंटलैंड

फ्रांस का एक जहाज़
फ़्रांस के इस जहाज़ का अपहरण करनेवाले जलदस्युओं ने 20 लाख डॉलर माँगे थे

दरअसल सोमालिया के अर्धस्वायत्त तटीय इलाक़े पुंटलैंड में जहाज़ों का अपहरण ज़िंदगी का एक हिस्सा सा बन चुका है.

जैसे ही ख़बर आती है कि जलदस्युओं ने किसी जहाज़ पर कब्ज़ा कर लिया है, पुंटलैंड में लोग बंदरगाह की ओर भागने लगते हैं जहाँ अपहृत जहाज़ खड़े होते हैं.

कोट-पैंट-टाई लगाए लोग बड़ी गाड़ियों में आते हैं, साथ में लैपटॉप कंप्यूटर होता है, कोई कहता है कि वह दस्युओं का एकाउंटेंट है तो कोई अपने आपको उनका मुख्य वार्ताकार बताता है.

ये मौक़ा बहुत सारा पैसा बनाने का होता है और सबकी नज़र होती है अपने हिस्से पर.

जहाज़ छुड़वाने के लिए फिरौती की रकम तीन लाख से 15 लाख डॉलर के बीच होती है.

और इस सबके बीच पुंटलैंड लगातार फलता-फूलता जा रहा है. वहाँ एक-से-एक घर बन रहे हैं, महँगी कारें ख़रीदी जा रही हैं.

और ये सब हो रहा है एक ऐसे देश में जहाँ पिछले 20 साल से कोई सरकार नहीं है जो शासन कर पा रही हो.

प्रेक्षकों का मत है कि जलदस्युओं ने पिछले साल अपने 'कारोबार' से लगभग तीन करोड़ डॉलर कमाए यानी पुंटलैंड के वार्षिक बजट दो करोड़ डॉलर से - एक करोड़ डॉलर ज़्यादा.

और अब जबकि इतनी कमाई हो रही है तो 21वीं सदी के ये जलदस्यु अत्याधुनिक हथियार और स्पीडबोट रख सकते हैं.

कुल मिलाकर लगता यही है कि जबतक उनको रोकने के लिए वाक़ई कुछ ठोस नहीं किया गया, अदन की खाड़ी में फिरौती के लिए जहाज़ों का अपहरण जारी रहेगा.

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