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सीरिया, लेबनान में दूतावासों पर सहमति | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद ने कहा है कि उनका देश लेबनान के साथ औपचारिक संबंध शुरू करने की शुरुआत करने के लिए बेरूत में अपना दूतावास खोलने और राजदूत नियुक्त करने के लिए तैयार है. अब से पहले सीरिया और लेबनान के बीच कूटनीतिक संबंध नहीं रहे हैं इसलिए एक दूसरे के यहाँ इनके दूतावास भी नहीं रहे हैं. ख़ासतौर से हाल के समय में सीरिया और लेबनान के संबंधों में ख़ासी कड़वाहट रही है. लेबनान के साथ औपचारिक संबंध बहाल करने के सीरिया के बयान का सबसे ज़्यादा स्वागत तो राजधानी बेरूत में ही होगा. हालाँकि सीरिया ने अभी यह नहीं कहा है कि ये औपचारिक संबंध कब बहाल होंगे. लेबनान में सीरिया के दूतावास को खोलने की हिमायत करने वाले लेबनानी दल दरअसल सीरिया विरोधी नज़रिया रखते हैं और उनका मानना है कि अगर सीरिया बेरूत में अपना दूतावास खोलता है तो इससे लेबनान की संप्रभुता और स्वतंत्रता को एक तरह से सीरिया की मान्यता मिल जाएगी. सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद और लेबनान के हाल ही में निर्वाचित राष्ट्रपति मिशेल सुलेमान के बीच मुलाक़ात का आयोजन फ्रांस के राष्ट्रपति निकोला सरकोज़ी ने किया. सीरिया की भूमिका इस दौरान सरकोज़ी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सीरिया को मध्य पूर्व क्षेत्र में अहम भूमिका अदा करनी है. राष्ट्रपति निकोला सरकोज़ी का कहना था,'' मैं राष्ट्रपति बशर अल असद से कहना चाहता हूँ कि यह बहुत अहम बात है कि सीरिया मध्य पूर्व क्षेत्र में अपनी सक्रिय भूमिका अदा करे और फ्रांस के लिए यह बहुत अहम बात है कि बातचीत का जो रास्ता हमने चुना है वह खुला, बेबाक और निष्ठा वाला घटनाक्रम रहे.'' लेबनान में लगभग तीस साल तक सीरिया के हज़ारों सैनिक और गुप्तचर अधिकारी तैनात रहे और उनके ज़रिए लेबनान की सरकार पर सीरिया का भारी प्रभाव रहा. लेकिन फ़रवरी 2005 में पूर्व प्रधानमंत्री रफ़ीक हरीरी की हत्या के बाद उसी साल के अंत तक सीरिया को लेबनान से अपने तमाम सैनिक और गुप्तचर अधिकारी हटाने पड़े. हरीरी की हत्या के आरोप सीरिया पर लगाए गए थे हालाँकि सीरिया ने इन आरोपों से बार-बार इनकार किया था. उसके बाद से लेबनान की कमज़ोर कही जाने वाली सरकार में सीरिया विरोधी गुट काफ़ी सक्रिय रहे हैं. हाल के समय में लेबनान के हालात में बदलाव ये आया है कि सीरिया के समर्थक गुटों ने हिज़बुल्लाह के नेतृत्व में लेबनान में राष्ट्रीय एकता वाली सरकार में ताक़तवर भूमिका हासिल कर है. इस घटनाक्रम से सीरिया का यह भरोसा बढ़ा है कि अब लेबनान की तरफ़ से उसके हितों को सीधी चुनौती नहीं मिलेगी. अगर इस संदर्भ में देखा जाए तो लेबनान में सीरिया का दूतावास खोलना कोई ज़्यादा बड़ी क़ीमत नहीं होगी और राष्ट्रपति बशर अल असद ने भी ऐसा ही संकेत दिया है. | इससे जुड़ी ख़बरें हिज़्बुल्ला जासूस को वापस भेजा गया01 जून, 2008 | पहला पन्ना इसराइल-सीरिया में वार्ता की पुष्टि21 मई, 2008 | पहला पन्ना बुश की लेबनान को मदद की पेशकश13 मई, 2008 | पहला पन्ना लेबनान में गुटों के बीच सहमति21 मई, 2008 | पहला पन्ना 'हिज़बुल्ला - शांति के लिए ख़तरा'10 मई, 2008 | पहला पन्ना पश्चिमी बेरूत पर हिज़बुल्लाह का क़ब्ज़ा09 मई, 2008 | पहला पन्ना गद्दाफ़ी अरब नेताओं पर बरसे29 मार्च, 2008 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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