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लेबनान में गुटों के बीच सहमति | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लेबनान में अनेक प्रतिद्वंद्वी गुटों के नेता उस राजनीतिक गतिरोध को समाप्त करने का रास्ता निकालने पर सहमत हो गए हैं जिसकी वजह से पिछले दिनों काफ़ी हिंसा हुई थी. यह हिंसा लेबनान में 1975-90 के दौरान चले गृहयुद्ध के बाद से सबसे भीषण हिंसा थी. ग़ौरतलब है कि उस गृहयुद्ध में लेबनान ने जानमाल की भारी तबाही देखी थी. लेबनान के विभिन्न गुटों के नेताओं के बीच यह समझौता अरब देशों ने कराया है जिसके तहत राष्ट्रीय एकता वाली एक सरकार का गठन किया जाएगा और चुनावी सुधार भी किए जाएंगे. इसके बाद अब संसद एक नया राष्ट्रपति चुन सकेगी. लेबनान में नवंबर 2007 के बाद से राष्ट्रपति का पद ख़ाली पड़ा था. संवाददाताओं का कहना है कि यह समझौता विपक्षी संगठन हिज़बुल्लाह के लिए एक बड़ी जीत है क्योंकि उसकी ज़्यादातर माँगें इसमें पूरी हो गई हैं. इस समझौते से हिज़बुल्लाह के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे को कैबिनेट में ज़्यादा सीटें मिलेंगी जिससे उसे वीटो पॉवर मिल जाएगी और चुनावी सुधारों में उसकी बात को वज़न मिलेगा जिससे साल 2009 में होने वाले संसदीय चुनावों पर कोई निर्णायक असर पड़ सकता है. सरकार समर्थकों का कहना है कि हिज़बुल्लाह के पास हथियारों के भंडार के विवादास्पद मुद्दे पर भी विचार किया गया है. इन्हीं हथियारों का इस्तेमाल करके हिज़बुल्लाह ने राजधानी बेरूत के पश्चिमी हिस्सों में मई 2008 कुछ समय के लिए क़ब्ज़ा कर लिया था. एक सांसद मारवाँ हमादेह ने कहा है, "इस समझौते के तहत किसी भी गुट पर अपने निजी हथियारों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है... और हथियारों से संबधित तमाम मुद्दों पर बातचीत का सहारा लेने की बात कही गई है."
हिज़बुल्लाह अभी तक अपनी सैन्य क्षमता को त्यागने से इनकार करता रहा है और इसके लिए उसका तर्क रहा है कि उसकी सैन्य क्षमता इसराइल के ख़िलाफ़ संघर्ष के लिए बहुत ज़रूरी है. ग़ौरतलब है कि इसराइल लेबनान के दक्षिणी पड़ोसी है और हिज़बुल्लाह उसे अपना दुश्मन मानता है. इसराइल लेबनान पर पिछले दशकों में कई हमले भी कर चुका है. लेबनान के सेना प्रमुख जनरल मिशेल सुलेमान को सभी पक्षों ने अगले राष्ट्रपति के लिए एक उम्मीदवार के रूप में स्वीकार करने का फ़ैसला किया है. राजनीतिक मतभेदों की वजह से संसद में राष्ट्रपति के चुनाव के लिए मतदान नहीं हो पा रहा था. नवंबर 2007 तक एमाइल लाहौद लेबनान के राष्ट्रपति थे जिन्हें सीरिया समर्थक माना जाता था. सड़कों पर लड़ाई विपक्षी सांसद अली हसन ख़लील ने कहा है कि राष्ट्रपति के चुनाव के लिए संसद में गुरूवार या शुक्रवार को मतदान हो सकता है. लेबनान में वर्ष 2006 के आख़िरी दिनों से ही राजनीतिक संकट की स्थिति रही है जब विपक्षी दल राष्ट्रीय एकता वाली सरकार से बाहर हो गए थे. विपक्षी दलों की माँग थी कि उन्हें ज़्यादा शक्तियाँ और सरकार के फ़ैसलों को वीटो करने का भी अधिकार मिलना चाहिए. क़रीब एक पखवाड़ा पहले जो विभिन्न गुटों के बीच हथियारबंद लड़ाई हुई थी उसमें लगभग 65 लोगों की जान चली ग था. सरकार ने हिज़बुल्लाह के टेलीफ़ोन नेटवर्क को ग़ैरक़ानूनी क़रार देते हुए उसे बंद कर दिया था जिससे हिंसा भड़क उठी थी. | इससे जुड़ी ख़बरें बुश की लेबनान को मदद की पेशकश13 मई, 2008 | पहला पन्ना 'हिज़बुल्ला - शांति के लिए ख़तरा'10 मई, 2008 | पहला पन्ना पश्चिमी बेरूत पर हिज़बुल्लाह का क़ब्ज़ा09 मई, 2008 | पहला पन्ना गद्दाफ़ी अरब नेताओं पर बरसे29 मार्च, 2008 | पहला पन्ना 'हरीरी की हत्या आपराधिक तंत्र ने की'28 मार्च, 2008 | पहला पन्ना इमाद का जनाज़ा, हरीरी की बरसी14 फ़रवरी, 2008 | पहला पन्ना धमाके में 'हिज़्बुल्लाह नेता की मौत'13 फ़रवरी, 2008 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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