BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
मंगलवार, 20 मई, 2008 को 09:19 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
बर्मा में तीन दिन का राष्ट्रीय शोक
तूफ़ान से हुआ नुक़सान
तूफ़ान के कारण 24 लाख लोगों के बुरी तरह प्रभावित होने का अनुमान है
बर्मा में तूफ़ान नर्गिस की चपेट में आकर मारे गए दसियों हज़ार लोगों की याद में तीन दिन का राष्ट्रीय शोक मनाया जा रहा है.

तूफ़ान के 18 दिनों बाद देश भर में राष्ट्रीय झंडे आधे झुके हुए हैं.

इस बीच सैन्य सरकार ने सीमित मात्रा में अंतरराष्ट्रीय सहायता स्वीकार करने की हामी भरी है.

संवाददाताओं का कहना है कि इससे संकेत मिलता है कि सरकार को अब अहसास हो रहा है कि यह त्रासदी कितनी बड़ी है.

उल्लेखनीय है दो मार्च को आए तूफ़ान में 78 हज़ार लोग मारे गए और सरकारी आँकड़ों के अनुसार 56 हज़ार लोग अभी भी लापता हैं.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इस तूफ़ान से 24 लाख लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और दसियों हज़ार लोग शिविरों में रह रहे हैं क्योंकि तूफ़ान से उनके घर नष्ट हो गए.

शोक

बर्मा ने राष्ट्रीय शोक की घोषणा तब की जब उनके नज़दीकी मित्रदेश चीन ने अपने देश में भूकंप में मारे गए लोगों की याद में शोक मनाने की घोषणा की.

इसकी घोषणा सरकारी टेलीविज़न पर की गई.

रविवार और सोमवार को सैन्य सरकार के प्रमुख जनरल शान श्वे ने पहली बार तूफ़ानग्रस्त इलाक़ों का दौरा किया.

इस बीच सोमवार को सिंगापुर में हुई आपात बैठक में बर्मा ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय मदद स्वीकार करने पर सहमत हो गया है.

हालांकि उसने दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के संगठन ( आसियान ) को ये भी बता दिया है कि बर्मा चाहेगा कि मदद उसके क्षेत्रीय संगठनों के ज़रिए दी जाए न कि पश्चिमी एजेंसियों के ज़रिए.

संवाददाताओं का कहना है कि ऐसा लगता है कि बर्मा के सैन्य शासन को ये बात समझ में आने लगी है कि अंतरराष्ट्रीय मदद की ज़रूरत है.

लेकिन वो पश्चिमी राहत एजेंसियों के कार्यकर्ताओं को देश में बड़े पैमाने पर प्रवेश देने से डरता है.

इससे पहले अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बात पर नाराज़गी ज़ाहिर कर चुके हैं कि बर्मा सहायता एजेंसियों को तूफ़ान पीड़ितों की सहायता ले लिए अनुमति नहीं दे रहा है.

इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>