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इस्लाम पर विवादित फ़िल्म इंटरनेट पर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नीदरलैंड के एक धुर दक्षिण पंथी राजनीतिक नेता ने इस्लाम को हिंसक धर्म बताने वाली अपनी विवादित फ़िल्म को इंटरनेट के ज़रिए रिलीज़ किया है. ग्रीत विल्डर्स की 15 मिनट की यह फ़िल्म अंग्रेज़ी और डच दोनों ही भाषाओं में उपलब्ध है और इस फ़िल्म से पहले यह चेतावनी दी जाती है कि इसमें कुछ विचलित करने वाले चित्र हो सकते हैं. इस फ़िल्म को मुसलमान क़ानूनी चुनौती देने जा रहे हैं. उधर नीदरलैंड के प्रधानमंत्री जैन पीटर बाल्केनेंडे ने राष्ट्रीय टेलीविज़न पर दिए गए बयान में इस फ़िल्म की निंदा की है. उन्होंने कहा है कि इस फ़िल्म का उद्देश्य इस्लाम पर हमला करने के अलावा कुछ और नहीं दिखता. यह फ़िल्म ऐसे समय में रिलीज़ की गई है जब पैगंबर हज़रत मोहम्मद के कार्टून का विवाद फिर से सुर्खियों में है क्योंकि डेनमार्क के कुछ अख़बारों ने विवादित कार्टून को फिर से प्रकाशित कर दिया है. इस कार्टून को लेकर पहले भी विवाद हुए हैं और हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए हैं. एकतरफ़ा ग्रीत विल्डर्स ने अपनी फ़िल्म का नाम रखा है 'फ़ितना'. क़ुरान से लिए गए इस शब्द का अर्थ होता है अनबन, कलह, विवाद और बला आदि. विल्डर्स की इस फ़िल्म के अंत में संदेश यही है कि इस्लामीकरण को रोका जाए. उन्होंने इस्लाम की तुलना साम्यवाद और नाज़ीवाद से की है और कहा है कि यह पश्चिम में आज़ादी को चुनौती देता है और इसे हर हाल में परास्त किया जाना चाहिए. लेकिन अपनी बात रखने के लिए नीदरलैंड के इस राजनीतिज्ञ ने ऐसी तस्वीरों का सहारा लिया है जो मुसलमानों को नाराज़ करेगा.
उदाहरण के तौर पर डेनमार्क के अख़बारों में छपा वह कार्टून फिर से दिखाया गया है जिसे लेकर पहले ही काफ़ी बवाल मच चुका है. इस कार्टून में पैगंबर हज़रत मोहम्मद की पगड़ी में बम रखा हुआ दिखाया गया था. पूरी फ़िल्म में विल्डर्स ने क़ुरान की आयतों के साथ ऐसे कट्टरपंथी मुसलमान धर्म प्रचारकों को दिखाया है जो अपने अनुयायियों को जेहाद छेड़ने की शिक्षा दे रहे हैं. दूसरी ओर चरमपंथी हमलों की तस्वीरें दिखाई गई हैं. फ़िल्म में 11 सितंबर के हमले से लेकर मैड्रिड ट्रेन विस्फोट में जली हुई लाशों तक की तस्वीरों का व्यापक उपयोग किया गया है. लेकिन यह इस्लाम को लेकर एकतरफ़ा विचार दिखाई देते हैं. इसमें ऐसे किसी मुसलमान को नहीं दिखाया गया है जिसने 'आतंकवादी हमलों की निंदा' की हो...जबकि हक़ीकत में बड़ी संख्या में मुसलमानों ने ऐसा किया है. इस फ़िल्म का संदेश यह नहीं है कि यूरोप को चरपमंथ से निपटना चाहिए और इस्लाम की नरमपंथी व्याख्याओं को प्रचारित करना चाहिए. बल्कि विल्डर्स का तर्क यह है कि इस्लाम एक हिंसक धर्म है और और इससे निपटने का सबसे अच्छा तरीक़ा यह है कि इसे पूरी तरह हरा दिया जाए. हालांकि उन्होंने अपनी फ़िल्म में ऐसा कुछ नहीं दिखाया है जिससे सनसनी फ़ैले..उन्होंने न तो क़ुरान को अपमानित करने वाले दृश्य दिखाए हैं और न पैगंबर हज़रत मोहम्मद को अपमानित करने वाली नई तस्वीरें दिखाई हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें अमरीका में आए इस्लामी सुपरमैन 21 अक्तूबर, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'इस्लाम को चोट पहुँचाना है मकसद'24 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना ख़ुद से युद्ध लड़ता पाकिस्तान31 जनवरी, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस मुसलमानों को ठेस पर पोप को 'खेद'16 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना 9/11 के बाद इस्लाम का राजनीतिकरण09 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना 'पश्चिमी देशों की इस्लाम पर जंग जारी'23 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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