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'इस्लाम को चोट पहुँचाना है मकसद' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व में सबसे ज़्यादा मुस्लिम आबादी वाले देशों में से चार में एक मत सर्वेक्षण हुआ है. इसके मुताबिक ज़्यादातर लोग मानते हैं कि अमरीकी विदेश नीति का एक मुख्य मक़सद इस्लाम को चोट पहुँचाना है. ये सर्वेक्षण वर्ल्ड पब्लिक ओपिनियन ऑर्ग नाम की संस्था ने करवाया है. इसमें मिस्र, इंडोनेशिया, मोरक्को और पाकिस्तान में रहने वाले मुसलमानों से बात की गई. सर्वेक्षण के मुताबिक जिन लोगों से सवाल पूछे गए उनमें से दो-तिहाई से ज़्यादा मानते हैं कि सभी मुस्लिम देशों को एकीकृत हो जाना चाहिए. मिस्र, इंडोनेशिया, मोरक्को और पाकिस्तान के चार हज़ार से ज़्यादा लोगों ने सर्वेक्षण में हिस्सा लिया. सर्वेक्षण के अनुसार 64 फ़ीसदी लोगों का मानना है कि अमरीका मुस्लिम देशों में ईसाई धर्म फैलाना चाहता है. अल क़ायदा के मकसदों को लेकर भी लोगों ने समर्थन जताया लेकिन इन्हें हासिल करने के लिए जो तरीके अपनाए जा रहे हैं उससे लोग सहमत नज़र नहीं आए. करीब 70 फ़ीसदी लोगों ने अल क़ायदा की अमरीका विरोधी नीति का समर्थन किया लेकिन साथ ही हिंसा का विरोध भी किया. लोगों का कहना है कि ये इस्लाम के ख़िलाफ़ है. जब सर्वेक्षण में लोगों से पूछा गया कि अमरीका में 9/ 11 के हमलों के लिए कौन ज़िम्मेदार है, तो पाकिस्तान में केवल तीन फ़ीसदी लोगों ने मान कि इसके लिए अल क़ायदा ज़िम्मेदार है. सर्वेक्षण से मुस्लिम देशों के बीच मत विभाजन भी सामने आया. मिस्र में 50 फ़ीसदी लोग शरिया क़ानून लागू किए जाने के पक्ष में है लेकिन इंडोनेशिया में केवल 18 फ़ीसदी लोग ऐसा सोचते हैं. इंडोनेशिया सबसे ज़्यादा मुस्लिम आबादी वाला देश है. | इससे जुड़ी ख़बरें वैटिकन ने भी बुरक़े पर एतराज़ जताया14 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना 'पश्चिम और मुस्लिमों के बीच खाई बढ़ी'13 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना 'विभिन्न धर्मों के बीच संवाद ज़रूरी' 25 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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