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मुसलमानों को ठेस पर पोप को 'खेद' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वेटिकन सिटी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि पोप बैनेडिक्ट 16वें ने अपनी इस्लाम संबंधी टिप्पणी से मुसलमानों को ठेस पहुँचने पर अफ़सोस जताया है. वेटिकन के एक पदाधिकारी कार्डिनल टार्सीसियो बर्टोने ने शनिवार को बताया कि पोप ने इस बात को लेकर खेद व्यक्त किया है कि उनके कुछ वाक्यों से इस्लाम में विश्वास रखने वाले लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँची है. बयान में कहा गया है कि पोप इस्लाम का सम्मान करते हैं और आशा करते हैं कि उनकी टिप्पणी को सही अर्थों में समझा जाएगा. रोम स्थित बीबीसी संवाददाता के मुताबिक वेटिकन की ओर से इस मामले में जिस तेज़ी से प्रतिक्रिया दी गई है उससे यह साफ़ झलकता है कि इस विषय को कितनी गंभीरता से लिया गया है. ग़ौरतलब है कि इस मसले पर विवाद तक शुरू हुआ जब गत मंगलवार को जर्मनी के एक विश्वविद्यालय में एक भाषण में पोप ने 14वीं शताब्दी के एक ईसाई राजा की उन बातों का हवाला दिया जिनमें इस्लाम के बारे में नकारात्मक टिप्पणी की गई थीं. इस राजा ने पैगम्बर मोहम्मद के बारे में टिप्पणी की थी कि मोहम्मद पैगम्बर के संदेश ने दुनिया को केवल 'दुष्टता और अमानवीयता' दी. निंदा पोप के इस बयान की दुनियाभर में मुस्लिम समुदाय के नेताओं और लोगों की ओर से निंदा की गई थी. इसके ख़िलाफ़ कई विरोध-प्रदर्शन भी हुए थे जिनमें कहा गया था कि अपनी टिप्पणी के लिए पोप व्यक्तिगत रूप से माफ़ी माँगें. इस बाबत रोमन कैथोलिक चर्च की सफ़ाई के बावजूद उनकी नाराज़गी कम नहीं हुई थी.
वेटिकन ने इससे पहले कहा था कि पोप का उद्देश्य इस्लाम का अपमान करना नहीं था बल्कि वे विभिन्न धर्मों के बीच सम्मान की भावना जगाने की कोशिश कर रहे थे. मंगलवार को पोप की ओर से दिए गए भाषण पर विवाद शुरू होने के बाद उनकी नवंबर में संभावित तुर्की यात्रा पर भी पुनर्विचार हो सकता है. प्रतिक्रियाएँ रोम में कुछ टिप्पणीकारों का यह भी सुझाव है कि पोप के भाषण को अरबी भाषा में अनुवाद करके प्रकाशित किया जाए और लोगों के बीच उपलब्ध कराया जा सके ताकि लोग ख़ुद इस बात का आकलन कर सकें कि पोप ने किस संदर्भ में यह बात कही थी. जिन लोगों की ओर से इस बयान को लेकर प्रतिक्रियाएँ आई हैं उनमें पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ भी हैं जिन्होंने कहा था कि ऐसे प्रयासों को खुले तौर पर ख़ारिज किया जाना चाहिए जो आतंकवाद को इस्लाम से जोड़कर देखते हैं. उन्होंने क्यूबा में गुटनिरपेक्ष देशों के सम्मेलन के दौरान अपना विरोध दर्ज किया. मलेशिया के प्रधानमंत्री अब्दुल्ला अहमद बादावी कि पोप को अहसास होना चाहिए कि उनके कथन से कितने लोगों की भावनाएँ आहत हुई हैं. उधर जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल ने खुले तौर पर पोप का पक्ष लेते हुए कहा कि पोप की कही गई बात का ग़लत अर्थ निकाला जा रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें अनेक देशों में पोप की आलोचना16 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना पोप के बयान पर प्रतिक्रियाएँ15 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना पोप के इस्लाम संबंधी बयान?15 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना पोप बेनेडिक्ट और विवाद!15 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना पोप के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन15 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना पोप की टिप्पणी से मुसलमान नाराज़15 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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