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शुक्रवार, 15 सितंबर, 2006 को 14:46 GMT तक के समाचार
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पोप के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन
पोप
चर्च की सफ़ाई के बावजूद नाराज़गी घटी नहीं है
पोप बैनेडिक्ट के इस्लाम और पवित्र युद्ध या जेहाद पर दिए गए बयान पर वेटिकन की तरफ़ से दिए गए स्पष्टीकरण के बावजूद पोप की आलोचना नहीं रुकी है.

इस मुद्दे पर कई देशों में तनाव है और मुस्लिम नेता नाराज़ हैं. तुर्की, मिस्र और पाकिस्तान में इस पर तीखी प्रतिक्रिया हुई है.

रोमन कैथोलिक चर्च की सफ़ाई के बावजूद उनकी नाराज़गी कम नहीं हुई है.

जर्मनी में मंगलवार को एक भाषण में पोप ने 14वीं सदी के एक सम्राट की कही हुई ये बात उद्धृत की कि पैगम्बर मोहम्मद ने दुनिया में सिर्फ़ "बुरी और अमानवीय" चीज़ें ही फैलाई हैं.

पाकिस्तान की संसद ने सर्वसम्मति से पारित एक प्रस्ताव में पोप की टिप्पणी को अपमानजनक बताया है और पोप से माफ़ी माँगने को कहा है.

पाकिस्तानी संसद का प्रस्ताव काफ़ी तीखा था जिसमें कहा गया, "पोप की जेहाद के फ़लसफ़े और हज़रत मोहम्मद के बारे में अपमानजनक टिप्पणी पूरे मुस्लिम जगत में भावनाएँ आहत हुई हैं. इनसे धर्मों के बीच विवाद फैलने का ख़तरा पैदा हो गया है."

इस प्रस्ताव में कहा गया कि पोप की टिप्पणी इस्लाम विरोधी है और उन्हें अपनी इस टिप्पणी के लिए माफ़ी मांगनी चाहिए.

बाद में पाकिस्तानी सीनेट ने भी पोप की निंदा करने वाला प्रस्ताव पारित करते हुए कहा कि पोप को विभिन्न धर्मों के बीच भाईचारा बढ़ाने के लिए काम करना चाहिए और ऐसे बयान देने से बचना चाहिए जिनके बारे में भ्रम पैदा हो जाए.

भारत में अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हमीद अंसारी ने बीबीसी से कहा, "मैंने पोप के बयान को जस का तस नहीं देखा है लेकिन जैसा कि कहा जा रहा है, उनकी टिप्पणी किसी और युग के बारे में थी. "

"पोप ने जिन शब्दों का इस्तेमाल किया है वे 12वीं सदी के किसी ऐसे राजा के लगते हैं जिसने धर्मयुद्ध का आदेश दिया होगा."

हमीद अंसारी ने कहा, "इस पर मुझे अचरज हुआ है क्योंकि वेटिकन के मुस्लिम दुनिया के साथ बड़े अच्छे संबंध हैं."

तुर्की में माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है. महत्वपूर्ण है कि तुर्की पहला मुस्लिम देश है जहाँ पोप नवंबर में जाने वाले हैं.

तुर्की के एक वरिष्ठ मौलवी ने पोप के बयान के बारे में कहा है, "पोप का बयान अत्यधिक चिंताजनक, दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है."

उन्होंने कहा है कि इससे वे बुरी तरह से आहत हुए हैं. इस तरह की टिप्पणियाँ मिस्र और सऊदी अरब से भी आई हैं.

तुर्की के एक वरिष्ठ मौलवी अली बार्तोकोगलु ने कहा है, "इस्लाम नहीं बल्कि ईसाइयत का प्रचार बल पूर्वक किया जाता रहा है."

 पोप की जेहाद के फ़लसफ़े और हज़रत मोहम्मद के बारे में अपमानजनक टिप्पणी पूरे मिस्लिम जगत में भावनाएँ आहत हुई हैं. इनसे धर्मों के बीच विवाद फैलने का ख़तरा पैदा हो गया है
पाकिस्तानी संसद का प्रस्ताव

मिस्र में मुस्लिम ब्रदरहुड ने कहा है कि पोप के बयान से उस तर्क को बल मिला है कि पश्चिमी देश इस्लाम से संबंधित किसी भी विषय या चीज़ के ख़िलाफ़ हैं.

चर्च का स्पष्टीकरण

वैटिकन के प्रवक्ता फ़ादर फ़ेडेरिको लोम्बार्डी ने कहा है कि पोप का उद्देश्य इस्लाम का अपमान करना नहीं था बल्कि वे विभिन्न धर्मों के बीच सम्मान की भावना जगाने की कोशिश कर रहे थे.

फ़ादर लोम्बार्डी ने कहा है कि जब पोप ने छह सदी पहले एक ईसाई राजा के कथन को दोहराया तो उनका उद्देश्य इस्लाम के पवित्र युद्ध या जेहाद का छिद्रांवेषण करना नहीं था.

पोप जर्मनी में अपने गृह नगर के प्रवास पर थे और वहाँ उन्होंने चौदहवीं शताब्दी के ईसाई राजा के हवाले से कहा था कि मोहम्मद पैग़म्बर का यह संदेश कि तलवार के दम पर धर्म का प्रचार किया जाए, 'दुष्टता और अमानवीय' था.

वैटिकन का कहना है कि पोप के बयान को ग़लत ढंग से प्रचारित किया गया.

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