|
पोप की टिप्पणी से मुसलमान नाराज़ | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पोप बैनेडिक्ट के इस्लाम और पवित्र युद्ध या जेहाद पर दिए गए एक बयान को लेकर मुस्लिम नेता गंभीर रुप से नाराज़ हैं. रोमन कैथोलिक चर्च की सफ़ाई के बावजूद उनकी नाराज़गी कम नहीं हुई है. वेटिकन के प्रवक्ता फ़ादर फ़ेडेरिको लोम्बार्डी ने कहा है कि पोप का उद्देश्य इस्लाम का अपमान करना नहीं था बल्कि वे विभिन्न धर्मों के बीच सम्मान की भावना जगाने की कोशिश कर रहे थे. फ़ादर लोम्बार्डी ने कहा है कि जब पोप ने छह सदी पहले एक ईसाई राजा के कहे हुए को दोहराया तो उनका उद्देश्य इस्लाम के पवित्र युद्ध या जेहाद का छिद्रांवेषण करना नहीं था. पोप जर्मनी में अपने गृह नगर के प्रवास पर थे और वहाँ उन्होंने चौदहवीं शताब्दी के ईसाई राजा के हवाले से कहा था कि मोहम्मद पैगम्बर के इस संदेश ने कि तलवार के दम पर धर्म का प्रचार किया जाए दुनिया को केवल 'दुष्टता और अमानवीयता' दी. विरोध उनके इस बयान के बाद से तुर्की में माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है. तुर्की पहला मुस्लिम देश है जहाँ पोप नवंबर में जाने वाले हैं. तुर्की के एक वरिष्ठ मौलवी ने पोप के बयान के बारे में कहा है, "पोप का बयान अत्याधिक चिंताजनक, दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है." उन्होंने कहा है कि इससे वे बुरी तरह से आहत हुए हैं. इस तरह की टिप्पणियाँ मिस्र और सऊदी अरब से भी आई हैं. अली बार्तोकोगलु ने कहा है, "इस्लाम नहीं बल्कि ईसाइयत का प्रचार बल पूर्वक किया जाता रहा है." जबकि पाकिस्तान के इस्लाम के विद्वान जावेद अहमद ने पोप के बयान को ग़ैर-ज़िम्मेदाराना बताया है. लेकिन वेटिकन का कहना है कि पोप के बयान को ग़लत ढंग से प्रचारित किया गया. | इससे जुड़ी ख़बरें 9/11 के बाद इस्लाम का राजनीतिकरण09 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना चीन-वेटिकन तनाव बढ़ने की आशंका14 मई, 2006 | पहला पन्ना 'पश्चिमी देशों की इस्लाम पर जंग जारी'23 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना पोप परमाणु मुद्दों, फ़लस्तीनी राष्ट्र पर बोले16 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||