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ताइवान में मा यिंग-जेओ चुनाव जीते | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ताइवान में हुए राष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी पार्टी के उम्मीदवार मा यिंग-जेओ ने जीत हासिल कर ली है. आधिकारिक नतीजों के मुताबिक क्योमिनटैंग पार्टी के नेता मा यिंग-जेओ अपने प्रतिद्वंद्वी डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के फ़्रैंक साइ से 17 फ़ीसदी अंक आगे हैं. दोनों नेता चीन से अच्छे आर्थिक रिश्तों के पक्षधर हैं लेकिन ये संबंध कितनी करीबी होने चाहिए और कितने तेज़ी से इसके लिए क़दम उठाने होंगे, इसे लेकर मतभेद है. मा यिंग-जेओ कहते आए हैं कि वे जल्द से जल्द चीन से आर्थिक संबंध सुधारेंगे जबकि फ़्रैंक साइ का रवैया सतर्कतापूर्ण रहा है. अंतिम नतीजों के मुताबिक मा यिंग-जेओ को 58.45 फ़ीसदी वोट मिले हैं जबकि फ़्रैंक साइ को 42.55 फ़ीसदी वोट. मा यिंग-जेओ ने एपी समाचार एजेंसी को कहा, लोग भ्रष्ट नहीं साफ़-सुथरी सरकार चाहते हैं. वे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यस्था चाहते हैं, मंदी वाली नहीं. लोग ताइवान में शांति चाहते हैं. जनवरी में हुए संसदीय चुनाव में भी क्योमिनटैंग पार्टी को ज़बरदस्त जीत हासिल हुई थी और उसके पास संसद में दो-तिहाई सीटे हैं. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि मा यिंग-जेओ के पास अपनी नीतियों को लागू करने के लिए पर्याप्त जन आधार है. ताइवान को लेकर चीन कहता आया है कि ताइवान उसका हिस्सा है हालांकि 1949 के बाद से दोनों का शासन अलग-अलग रहा है. आज़ाद देश बनने की ओर क़दम उठाने की सूरत में चीन ने बलप्रयोग की बात से भी इनकार नहीं किया है. मा यिंग-जेओ चीन में निवेश को आसान बनाना चाहते हैं और वहाँ तक सीधी उड़ान भी शुरु करना चाहते हैं. उन्होंने चीन से शांति समझौते की बात भी की है. | इससे जुड़ी ख़बरें ताइवान में नेशनलिस्ट पार्टी की जीत12 जनवरी, 2008 | पहला पन्ना ताइवान चुनाव में राष्ट्रपति की पार्टी जीती14 मई, 2005 | पहला पन्ना ताइवान चीन से बातचीत का इच्छुक01 मई, 2005 | पहला पन्ना चीनी क़ानून 'भड़काऊ' है: ताइवान14 मार्च, 2005 | पहला पन्ना चीन-ताईवान के बीच विशेष उड़ानें29 जनवरी, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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