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ताइवान में नेशनलिस्ट पार्टी की जीत | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ताइवान की नेशनलिस्ट ग्वामिनडांग पार्टी ने देश में हुए संसदीय चुनाव में ज़बरदस्त जीत हासिल की है. केएमटी पार्टी को 113 में से 81 सीटें यानी कुल 72 फ़ीसदी सीटें मिलीं. पिछली बार उसे 49 फ़ीसदी सीटें मिली थीं. केएमटी पार्टी चीन से नज़दीकी संबंध बनाने की पक्षधर है. राष्ट्रपति चेन शुई-बायन की डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी चुनाव में हार गईं है और डीपीपी को 27 सीटें मिलीं. राष्ट्रपति ने घोषणा की है कि वे पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे रहे हैं. 22 मार्च को ताइवान में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने वाला है और संसदीय चुनाव के नतीजों को काफ़ी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. चीन मामलों के विशेषज्ञ शिरॉंग चेन कहते हैं कि दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों ने स्थानीय मुद्दों पर ध्यान दिया और चीन पर चर्चा करने से बचते रहे और चीन सरकार ने भी यही रुख़ अपनाया है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि चीन ने पिछली बार ताइवान में हुए चुनाव से सीख ली है कि चेतावनी जारी करने से डीपीपी को फ़ायदा पहुँचेगा जो स्वतंत्रता चाहती है. चीन ताइवान के कूटनयिक सहयोगियों से भी अपील करता आया है कि वो ताइवान से मान्यता हटाकर चीन को दें. चीन चाहता है कि ताइवान का फिर से उसमें एकीकरण हो जाए. नई चुनावी प्रक्रिया के तहत ताइवान के संसद में सीटें 225 से घटाकर 113 हो गई हैं. ये बदलाव 2005 में किए गए थे ताकि भ्रष्ट्राचार घटे और कार्यकुशलता बढ़े. लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि इससे छोटी पार्टियाँ हाशिए पर चली जाएँगी. | इससे जुड़ी ख़बरें ताइवान चुनाव में राष्ट्रपति की पार्टी जीती14 मई, 2005 | पहला पन्ना ताइवान चीन से बातचीत का इच्छुक01 मई, 2005 | पहला पन्ना ताइवान में चीन विरोधी प्रदर्शन26 मार्च, 2005 | पहला पन्ना चीनी क़ानून 'भड़काऊ' है: ताइवान14 मार्च, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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