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ताइवान चुनाव में राष्ट्रपति की पार्टी जीती | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ताइवान में नेशनल एसेंबली के लिए हुए मतदान में राष्ट्रपति चिन शुई बियान की डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (डीपीपी) ने सबसे ज़्यादा सीटें जीत ली हैं. निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार शुई बियान की पार्टी को 42.5 प्रतिशत मत हासिल हुए हैं जबकि विपक्षी नेशनलिस्ट पार्टी को 38.9 प्रतिशत वोट हासिल हुए हैं. राष्ट्रपति शुई बियान संवैधानिक सुधार के समर्थक माने जाते हैं. चीन को डर है कि संवैधानिक सुधारों से ताइवान पूर्ण स्वतंत्रता की ओर कदम उठा सकता है. नतीजों के बाद उप राष्ट्रपति ने पार्टी को शुभकामना दी है और चीन की आलोचना की है. चीनी नेताओं की ताइवान के विपक्षी नेताओं से हाल में हुई मुलाकातों को ताइवान के भीतर स्वतंत्रता विरोधी ताकतों को बल प्रदान करने के रूप में देखा जा रहा है. महत्वपूर्ण बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ये चुनाव चीन के लिए भी उतने ही महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. शुक्रवार को ताइवान की पीपुल्स फ़र्स्ट पार्टी के नेता जेम्स सूंग ने चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओं से मुलाक़ात की और भरोसा दिया कि वे चीन के साथ मिलकर काम करेंगे. चीन ने हाल में एक क़ानून पारित किया था जिसके अनुसार यदि ताइवान औपचारिक तौर पर अपनी स्वतंत्र घोषित करता है तो चीन उस पर हमला कर सकता है. ताइवान में लाखों लोगों ने चीन में पारित किए गए क़ानून के विरोध में प्रदर्शन किए थे. ताइवान में इस बार मतदाताओं से किसी व्यक्ति को नहीं बल्कि पार्टियों को वोट देने को कहा गया है. पार्टियों ने उम्मीदवारों की सूची सामने रखी है जिसमें बताया गया है कि वे संवैधानिक बदलावों का समर्थन करते हैं या नहीं. जिसे भी जीत हासिल होगी वह मतपत्र में उनकी पार्टी द्वारा घोषित स्थिति के अनुसार नेशनल एसेंबली में वोट देगा. ताइवान सरकार का कहना है कि वह कामकाज का तरीक़ा बदलना चाहती है और इसलिए संवैधानिक बदलाव की बात कर रही है. |
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