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चीन-ताईवान के बीच विशेष उड़ानें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चीन और ताईवान ने अपने संबंधों में सुधार करते हुए हवाई संबंध बहाल किए हैं जिससे तहत विशेष उड़ानें शुरू की जा रही हैं. 1949 से ही चीन और ताईवान के बीच हवाई संबंध नहीं रहे हैं. राष्ट्रवादियों और साम्यवादियों के बीच गृहयुद्ध में राष्ट्रवादियों की हार हुई थी जिसके बाद उन्होंने 1949 में ख़ुद को ताईवान द्वीप तक समेट लिया था और चीन के मुख्य हिस्से पर साम्यवादियों का शासन क़ायम हुआ था. अब दोनों देशों ने संबंध सुधारते हुए उड़ानें बहाल करने का फ़ैसला किया है और ये विशेष उड़ानें नए साल में छुट्टियों के मौसम में उड़ाई जाएंगी. इन उड़ानों के लिए दोनों देशों के हवाई अड्डों का विस्तार और आधुनिकीकरण किया जा रहा है. ताईवान ने उम्मीद ज़ाहिर की है कि इस क़दम के बाद दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता खुल सकेगा लेकिन चीन सरकार ने कहा है कि बाचतीत तभी शुरू हो सकती है जब ताईवान "एक चीन" का सिद्धांत स्वीकार करे. चीन अब भी ताईवान को "भगोड़ा प्रांत" मानता है. बीबीसी के बेजिंग संवाददाता का कहना है कि हालाँकि ये उड़ानें शुरू होने का एक नया क़दम है लेकिन चीन और ताईवान के बीच कुछ नए मुद्दों पर तनाव है. चीन एक ऐसा क़ानून बनाने की योजना बना रहा है जिसमें ऐसी व्यवस्था होगी कि अगर ताईवान आज़ादी की घोषणा करता है तो उसके ख़िलाफ़ बल प्रयोग किया जा सकता है. |
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