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अमरीका की ईरान के ख़िलाफ़ फिर मुहिम | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने घोषणा की है कि अमरीका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर संयुक्त राष्ट्र की ओर से कार्रवाई की फिर कोशिश करेगा. अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने कहा कि अमरीका इस बारे में संयुक्त राष्ट्र की तरफ़ से नया प्रस्ताव पास कराने के लिए ज़ोर लगाएगा. कोंडोलीज़ा राइस का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की रिपोर्ट के बाद सुरक्षा परिषद में तीसरा प्रस्ताव ले जाने की अच्छी ख़ासी वजह है. दरअसल ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि वो इस बात की गारंटी नहीं दे सकता कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है. रिपोर्ट में ये तो कहा गया है कि ईरान ने एजेंसी के साथ पहले के मुक़ाबले ज़्यादा सहयोग किया है लेकिन ये भी स्पष्ट कर दिया है कि ईरान की सरकार ने कुछ अहम सवालों के जवाब नहीं दिए हैं. ईरान ने इस रिपोर्ट को अपनी कामयाबी बताया है तो अमरीका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से नए प्रतिबंध लगाने की माँग की है. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी या आईएईए ने ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम के बारे में एक मिली जुली रिपोर्ट दी है. संयुक्त राष्ट्र की इस संस्था ने माना है कि ईरान की सरकार ने उसे कुछ नई जानकारी तो दी है लेकिन फिर भी उसे पूरा भरोसा नहीं है कि ईरान का कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए चलाया जा रहा है. आईएईए के प्रमुख मोहम्मद अल बारादेई ने कहा कि ईरान ने संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों को अपने परमाणु ठिकानों में जाने की पहले से ज़्यादा छूट दी. उनका कहना था कि कार्यक्रम के बारे में कुछ नई बातें भी सामने रखीं लेकिन फिर भी कुछ अहम गतिविधियों के बारे में महत्वपूर्ण सवालों के जवाब वह नहीं दे पाया है इसलिए ईरान के परमाणु कार्यक्रम को वो पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं. मोहम्मद अल बारादेई का कहना था कि पिछले चार महीनों में हमने लंबित मामलों पर स्पष्टीकरण हासिल करने में ख़ासी प्रगति की है. उनका कहना था कि ये मामले ईरान के पुरानी परमाणु गतिविधियों के बारे में हैं. यूरेनियम संवर्द्धन के बारे में भी हमें सारे सवालों के जवाब मिल गए हैं लेकिन एक मुद्दा है जो अब भी अटका हुआ है और वो है कथित तौर पर ईरान ने हथियारों के बारे में है. ईरान पर निशाना इस रिपोर्ट के सामने आते ही अमरीका ने एक बार फिर ईरान पर निशाना साधते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से माँग की है कि उस पर नए प्रतिबंध लगा दिए जाएँ. उधर ईरान ने इस रिपोर्ट को अपनी कामयाबी के रूप में पेश करने की कोशिश की है. ईरान के प्रमुख परमाणु वार्ताकार सईद जलीली ने कहा कि रिपोर्ट से स्पष्ट हो जाता है कि ईरान पर लगाए गए सभी आरोप ग़लत थे. उन्होंने अपने देश की जनता को इस रिपोर्ट पर बधाई भी दी. सईद जलीली का कहना था कि ईरान का रवैया इतना तर्कपूर्ण रहा है कि आज हमारे दुश्मन भी कुछ कहने लायक नहीं रहे. ये सब इसलिए कि ईरान का बर्ताव बिल्कुल शांतिपूर्ण रहा है. ईरान जो भी कहे, आईएईए की रिपोर्ट पर अब चर्चा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में होगी. इस बैठक में अमरीका, चीन, रूस, फ़्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी के प्रतिनिधि भाग लेंगे और संभावना यही है कि उस पर नए प्रतिबंध लगाए जाएँगे. इसकी एक वजह ये भी है कि ईरान अपनी पिछली गतिविधियों के बारे में जो भी कहे, वो अब भी लगातार यूरेनियम का संवर्द्धन कर रहा है. ये वो प्रक्रिया है जिसे पश्चिमी देशों को डर है कि ईरान परमाणु बम बनाने के लिए इस्तेमाल करेगा. |
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