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रूस ने ईरान को परमाणु ईंधन दिया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ईरान में बुशेहर परमाणु रिएक्टर के निर्माण में मदद करने के लिए रूस ने परमाणु ईंधन की पहली खेप भेज दी है. बुशेहर परमाणु रिएक्टर को समयसीमा के तहत पूरा करने पर दोनों पक्षों में पिछले हफ़्ते ही समौझाता हुआ. इसके निर्माण का काम कई बरसों से टलता आ रहा है. कई पश्चिमी देशों को डर है कि ईरान परमाणु हथियार बनाना चाहता है लेकिन ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण मकसद के लिए है. यूरेनियम संवर्धन का काम बंद न करने के कारण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परषिद दो बार ईरान पर प्रतिबंध लगा चुकी है. संवर्धित यूरेनियम का उपयोग परमाणु ऊर्ज संयंत्रों में ईंधन के तौर पर होता है. लेकिन उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने के लिए किया जा सकता है. बुशेहर संयंत्र ईरान ने 1974 में जर्मनी की मदद से पहली बार बुशेहर बंदरगाह के पास रिएक्टर बनाने की योजना बनाई थी. लेकिन 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद इस योजना को रद्द कर दिया गया. 1992 में रूस ने फिर से इस योजना को चालू करने की बात उठाई. परमाणु प्लांट बना रही रूसी कंपनी एटमस्ट्रोईएक्सपोर्ट का कहना है आईएईए द्वारा भेजे जाने से पहले ईंधन के डब्बों की जाँच हो गई है और उन्हें सील कर दिया गया है. रूसी विदेश मंत्रालय के मुताबिक उसे ईरान ने आश्वासन दिया है कि बुशेहर के अलावा ये ईंधन कहीं और इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. विदेश मंत्रालय के बयान में ईरान से आग्रह किया गया है कि वो यूरेनियम संवर्धन का काम बंद कर दे क्योंकि अब इसकी ज़रूरत नहीं है. लेकिन रॉयर्टस समाचार एजेंसी के मुताबिक एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा है कि उनका देश किसी भी सूरत में संवर्धन का काम बंद नहीं करेगा. | इससे जुड़ी ख़बरें 'नए प्रतिबंध लगाने पर सवाल'05 दिसंबर, 2007 | पहला पन्ना 'परमाणु रिपोर्ट ईरान की जीत'05 दिसंबर, 2007 | पहला पन्ना 'अमरीका ईरान नीति पर पुनर्विचार करे'04 दिसंबर, 2007 | पहला पन्ना 'ईरान पर दबाव बना रहे'04 दिसंबर, 2007 | पहला पन्ना 'अमरीका ने ईरान का ख़तरा ज्यादा आंका'03 दिसंबर, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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