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बुधवार, 05 दिसंबर, 2007 को 09:06 GMT तक के समाचार
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'अमरीका ने ईरान का ख़तरा ज्यादा आंका'
ईरान का परमाणु कार्यक्रम
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर विवाद चल रहा है
एक अमरीकी ख़ुफ़िया रिपोर्ट में कहा गया है कि अमरीका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम ख़तरे को ज़रूरत से ज्यादा आँका.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमरीका अब मानता है कि ईरान ने सन् 2003 में ही अपने परमाणु कार्यक्रमों को रोक दिया था और उसके बाद फिर उसे बहाल नहीं किया.

रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान अपने विवादित परमाणु कार्यक्रमों से परमाणु ईंधन बनाने के कार्यक्रम में लगा ज़रूर हुआ है, लेकिन उसका इस्तेमाल देश में ऊर्जा की कमी पूरी करना है.

साथ ही रिपोर्ट में एक अनुमान के आधार पर ये भी कहा गया है कि अगर ईरान परमाणु हथियार बनाने के लिए कार्यक्रम चलाना चाहे तो ये क्षमता उसे तकनीकी रूप से सन् 2009 तक ही हासिल हो सकती है.

लेकिन साथ ही रिपोर्ट में एक और बात ज़ोर देकर कही गई है कि इसकी संभावना नहीं लगती है.

रिपोर्ट में ये अनुमान भी दिया गया है कि सन् 2010 से लेकर 2015 तक हो सकता है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हासिल करने की कोशिश करे, लेकिन संभावना है कि उसे 2015 के बाद भी इसमे सफलता न मिले.

अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी के इस आकलन में ये भी कहा गया है कि अब ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रमों के सिलसिले में पहले से कहीं ज्यादा अंतरराष्ट्रीय दबाव सहना पडे़गा.

पिछले कुछ वर्षों से अपने विवादित परमाणु कार्यक्रमों को लेकर ईरान को अमरीका सहित दुनिया के कई देशों की ओर से जिस तरह सख्त चेतावनियां दी गईं, वो अमरीकी ख़ुफिया एजेंसी के इस आकलन की रौशनी में बिल्कुल उल्टी पड़ जाती है.

पिछले महीने भी अमरीकी राष्ट्रपति बुश ने कहा था कि अगर तीसरे विश्व युद्ध को न्योता नहीं देना है तो ईरान के परमाणु कार्यक्रमों को रोकना होगा.

हालांकि व्हाइट हाउस की ओर से एक वक्तव्य जारी कर ये कहा गया है कि ये रिपोर्ट बुश प्रशासन की उस नीति को सही ठहराती है, जिसमें ईरान को विवादित परमाणु कार्यक्रम का हल बातचीत के ज़रिये निकालने पर जो़र दिया जा रहा है.

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