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भारत को यूरेनियम नहीं देगा ऑस्ट्रेलिया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ऑस्ट्रेलिया ने भारत को यूरेनियम की बिक्री न करने की घोषणा की है क्योंकि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं. ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री स्टीफ़न स्मिथ ने कहा कि यह क़दम नई लेबर सरकार का चुनावी वादा था. यह क़दम पिछले प्रधानमंत्री जॉन हॉवर्ड की नीतियों के विपरीत है जो पिछले चुनाव में सत्ता से बाहर हो गए. दुनिया के ज्ञात यूरेनियम संसाधनों का 40 फ़ीसदी ऑस्ट्रेलिया के पास है और यह इस उत्पाद को 30 से भी ज़्यादा देशों को कड़ी शर्तों के साथ निर्यात करता है. नीति का उल्लंघन भारत को यूरेनियम देने के लिए जॉन हॉवर्ड ने वर्षों से चली आ रही इस ऑस्ट्रेलियाई नीति को बदल दिया था कि वह किसी भी ऐसे देश को यूरेनियम नहीं देगा जिसने एनपीटी पर हस्ताक्षर न किए हों. हॉवर्ड ने अपने फ़ैसले को सही ठहराते हुए तर्क दिया था कि इससे भारत भी परमाणु मुख्यधारा में आ जाएगा और परंपरागत साधनों से होने वाले गैस उत्सर्जन में कटौती की ओर बढ़ेगा. स्मिथ ने परमाणु मामले पर भारत के प्रतिनिधि श्याम सरन को बताया कि पुरानी नीति दोबारा बहाल की जा रही है. स्मिथ ने कहा, हमने अपनी नीतियों के प्रति दृढ़ रहने के वायदे के साथ चुनाव लड़ा है. इसलिए हम उन देशों को यूरेनियम निर्यात नहीं करेंगे जो एनपीटी के सदस्य नहीं हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'परमाणु समझौते पर आगे नहीं बढ़ने देंगे'22 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस सीपीएम ने फिर यूपीए सरकार को चेताया09 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस परमाणु समझौते पर विपक्ष का वॉकआउट05 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस समझौता परीक्षण से नहीं रोकता: मनमोहन28 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'देश के सामरिक हित सुरक्षित'17 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'समझौते से भारत की ताकत बढ़ेगी'27 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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