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परमाणु समझौते पर विपक्ष का वॉकआउट | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका से परमाणु समझौते के मुद्दे पर संसद में वामपंथी दलों और पूरे विपक्ष ने बुधवार को वॉकआउट किया जबकि केंद्र सरकार ने दोहराया है कि वो परमाणु समझौते से हाथ नहीं खींचेगी. राज्यसभा में परमाणु मसले पर बोलते हुए विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि समझौते का विरोध करने वालों का पक्ष मज़बूत नहीं है और देश में आर्थिक विकास की गति बनाए रखने के लिए सरकार समझौते से पीछे नहीं हटेगी. प्रणब मुखर्जी ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि भारत हाइट एक्ट के तहत नहीं बल्कि 123 समझौते के तहत काम करेगा. विदेश मंत्री का कहना था कि भारत परमाणु परीक्षण करने का अपना अधिकार नहीं छोड़ेगा. प्रणब मुखर्जी का कहना था इसका जो भी परिणाम होगा हम भुगतने के लिए तैयार हैं, जैसा 1974 और 1998 में हुआ था. वॉकआउट करीब एक घंटे तक चला प्रणब मुखर्जी का जबाव विपक्ष को संतुष्ट नहीं कर सका. सीपीएम नेता सीताराम येचुरी का कहना था, मैं संतु्ष्ट नहीं हूँ. मैं अभी भी समझौते के ख़िलाफ़ हूँ. संसद के ज़्यादातर सदस्य समझौते के पक्ष में नहीं है. जबकि भारतीय जनता पार्टी के नेता जसवंत सिंह ने इस बात पर सवाल उठाया कि सरकार समझौता लागू करने के लिए इतनी उतावली क्यों है. उनका कहना था, थोड़ा इंतज़ार करना चाहिए. लोगों को और संसद को अपने साथ लेकर चलना चाहिए. विपक्ष और वामदलों की आशंकाओं का जबाव देते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि समझौते का भारत की विदेश नीति या सामरिक नीति पर कोई असर नहीं पड़ेगा. | इससे जुड़ी ख़बरें समझौता परीक्षण से नहीं रोकता: मनमोहन28 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस मौजूदा समझौता मंज़ूर नहीं: आडवाणी28 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस भारत में लॉबिंग कितना कारगर?28 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'देश के सामरिक हित सुरक्षित'17 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'आईएईए के साथ चर्चा पर हरी झंडी'13 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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