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समझौता परीक्षण से नहीं रोकता: मनमोहन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लोक सभा में बुधवार को एक बार फिर घोषणा कि अमरीका के साथ असैनिक परमाणु समझौता भारत को भविष्य में परमाणु परीक्षण करने के अधिकार से नहीं रोकता है. लोक सभा में भारत अमरीका परमाणु समझौते पर चर्चा के दौरान संक्षिप्त हस्तक्षेप में उन्होंने कहा कि समझौते में ऐसा कुछ भी नहीं है जो भारत को परमाणु परीक्षण से रोकता हो. उन्होंने कहा कि भविष्य में सुरक्षा ज़रूरतों के लिहाज से आवश्यकता हुई तो भारत के परमाणु परीक्षण करने में कोई बाध्यता नहीं है. प्रधानमंत्री विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी के आरोप का जबाव दे रहे थे जिसमें उन्होंने कहा था कि यह समझौता भारत को उसके परमाणु परीक्षण के अधिकार से वंचित करता है. आडवाणी का कहना था कि समझौता भारत को ‘जूनियर पार्टनर’ के रूप में पेश करता है, यहाँ तक कि अमरीकी निरीक्षक भी भारत के परमाणु रिएक्टरों की जाँच कर सकते हैं. 'आशंकाएँ निराधार' प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विपक्ष के सभी आरोपों को ख़ारिज कर दिया. हालांकि करार पर हुई लंबी बहस का जवाब विदेशमंत्री ने दिया और विपक्षी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने प्रधानमंत्री के जवाब न देने के विरोध में सदन का बहिष्कार किया. विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने भी समझौते को लेकर उठाई जा रही आशंकाओं को निराधार बताया. उन्होंने कहा कि हाइड एक्ट को लेकर तमाम तरह की भ्रांतियां पैदा की जा रही है जबकि अमरीकी राष्ट्रपति बुश भी स्पष्ट कर चुके हैं कि हाइड एक्ट हम पर लागू नहीं होगा. उनका कहना था कि चूंकि भारत एनपीटी समझौते का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है इसलिए अमरीका को भारत के साथ समझौते के लिए हाइड एक्ट की छूट का सहारा लेना पड़ा है. प्रणव मुखर्जी ने स्पष्ट किया कि भारत अमरीका परमाणु करार में केवल 123 समझौता ही लागू होगा. विदेश मंत्री के जवाब से असंतुष्ट वामदलों ने सरकार से स्पष्ट आश्वासन देने को कहा कि वह समझौते पर और आगे नहीं बढ़ेगी. लेकिन प्रणव मुखर्जी ने केवल इतना कहा कि समझौते की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है इसलिए इस सवाल का कोई औचित्य नहीं है. |
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