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फ्रांसीसी नागरिकों को अफ्रीका में सज़ा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़्रीकी देश चाड की एक अदालत ने फ्रांस के छह राहतकर्मियों को बच्चों की तस्करी की कोशिश के आरोप में आठ साल क़ैद की सज़ा सुनाई है. चैरिटी संगठन जो आर्क में काम करने वाले इन छह राहतकर्मियों को अक्तूबर महीने में हिरासत में लिया गया था. फ्रांस के इन नागरिकों पर आरोप है कि इन्होंने क़रीब सौ बच्चों को चाड से दूसरे देश ले जाने की कोशिश की. चैरिटी का कहना है कि ये बच्चे चाड से लगे देश सूडान के दारफुर में संघर्ष के दौरान बेघरबार हुए अनाथ बच्चे थे जिन्हें वो यूरोप ले जा रहे थे ताकि यूरोपीय देशों में इन बच्चों की ठीक से देखभाल हो सके. हालांकि इनमें से अधिकतर बच्चे चाड के थे और इन सभी के मां बाप जीवित हैं. इस मामले ने चाड में तूल पकड़ लिया जिसके बाद देश भर में व्यापक प्रदर्शन हुए. चाड कुछ दशक पहले तक फ्रांस का गुलाम देश हुआ करता था. चाड में प्रदर्शनकारियों ने राहतकर्मियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी. ऐसी आशंकाएं थीं कि यूरोपीय होने के कारण आरोप झेल रहे फ्रांसीसी नागरिकों के ख़िलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की जाएगी. संवाद समिति एएफपी के अनुसार चार दिन की सुनवाई के बाद ये सज़ा सुनाई गई है. इसी मामले में चाड और सूडान के एक एक नागरिक को चार चार साल की सज़ा दी गई है. हालांकि बच्चों की तस्करी के आरोप में कनाडा के दो नागरिकों को रिहा कर दिया गया है. | इससे जुड़ी ख़बरें सत्तर लाख साल पुरानी खोपड़ी 10 जुलाई, 2002 | पहला पन्ना चाड में संघर्ष में कई लोगों की मौत13 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना क्या है चाड की हिंसक समस्या?13 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना 'दक्षिण अफ्रीका अपनी राह भटक रहा है'27 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना समलैंगिक विवाह को मंज़ूरी मिली14 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना सोमालिया में कई वर्षों से अस्थिरता15 मई, 2007 | पहला पन्ना शेरों पर भारी पड़े भैंसे09 अगस्त, 2007 | पहला पन्ना महंगी पड़ी कपास की ग़ैरक़ानूनी सब्सिडी16 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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