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मलेशिया में हिंदुओं का आंदोलन तेज़ | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मलेशिया में रहने वाले हिंदुओं का कहना है कि मलेशिया सरकार देश के हिंदू समुदाय के साथ भेदभाव का बर्ताव करती है और उसे विकास के अवसरों से वंचित रखा जाता है. इस 'भेदभाव' के ख़िलाफ़ मलेशिया की राजधानी कुआलालम्पुर में रविवार को हिंदू समुदाय के लोगों ने एक प्रदर्शन किया जिसमें भारतीय मूल के हज़ारों लोगों ने हिस्सा लिया. पुलिस ने इस रैली को तितर-बितर करने के लिए आंसूगैस और बल का प्रयोग किया और कई लोगों को गिरफ़्तार किया गया. यह पहला मौका है जब मलेशिया के भारतीय मूल के लोगों ने सरकार के ख़िलाफ़ इतना बड़ा अभियान छेड़ा है. भारतीय जनता पार्टी ने भारत सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है. रैली का आयोजन हिंदू राइट्स एक्शन फ़ोर्स नाम के एक संगठन ने किया था और इसके नेता वहाँ ब्रितानी उच्चायोग को एक याचिका देना चाहते थे जिसमें ब्रिटेन की महारानी से अपील की गई थी कि वो मलेशिया में भारतीय मूल के लोगों के साथ हो रहे 'भेदभाव' को रोकें. मगर इस रैली से दो दिन पहले ही मलेशिया की पुलिस ने संगठन के कई लोगों को गिरफ़्तार कर लिया और रैली की अनुमति देने से इनकार कर दिया. मलेशियाई पुलिस का कहना है कि ऐसी रैली से देश में सामुदायिक वैमनस्य को बढ़ावा मिलेगा. मलेशिया में कोई भी रैली सरकार की अनुमति के बिना नहीं हो सकती और ज़ाहिर सी बात है कि पुलिस सरकार विरोधी किसी रैली की अनुमति नहीं देना चाहती. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लगभग डेढ़ सौ साल पहले ब्रिटेन की सरकार उन्हें मज़दूरी के लिए मलेशिया लाई थी इसलिए मलेशिया की आज़ादी के बाद उनके हितों की रक्षा की ज़िम्मेदारी भी ब्रिटेन पर है. विरोध हिंदू राइट्स एक्शन फ़ोर्स के नेताओं का कहना है कि मलेशिया सरकार जिस पर मलय लोगों की ही पकड़ है हिंदुओं के हितों की लगातार अनदेखी करती रही है. मलेशिया में हिंदुओं की जनसंख्या करीब आठ प्रतिशत है और मलय लोगों को बाद चीनी मूल के लोग दूसरा सबसे बड़ा समुदाय हैं. दक्षिणपूर्व एशिया मामलों के जानकार और जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर गंगानाथ झा कहते हैं, "मलेशिया में हिंदुओं की समस्या की जड़े पुरानी हैं". उन्होंने कहा, "मलेशिया में विगत में शुरु हुए 20 सूत्री कार्यक्रम और राष्ट्रीय विकास कार्यक्रम में भी ज्यादातर स्थानीय मलाय लोगों के विकास को ही प्राथमिकता दी जाती रही है. नतीजा यह है कि शिक्षा और रोज़गार में भारतीयों का विकास नहीं हुआ है." डॉक्टर झा का कहना है कि भारतीयों के मुकाबले चीनी समुदाय का विकास कहीं ज्यादा हुआ है मगर चूंकि आरक्षण जैसी सुविधाएं सिर्फ़ मलय समुदाय को हासिल हैं चीनी मूल के लोग भी भारतीय समुदाय के साथ परिवर्तन चाहते हैं. दिल्ली में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने सरकार से मांग की है कि वो मलेशिया सरकार से बात करे. भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, "मलेशिया में भारतीय बड़ी संख्या में है. उनकी रोज़ी-रोटी की समस्या पैदा हो रही है. रोज़गार और उद्योग में लाइसेंस मिलने में उन्हें समस्या आती है. भारत सरकार को इस बारे में मलेशिया सरकार से बात करनी चाहिए जैसे चीन सरकार ने की थी, जब चीनी मूल के लोगों ने इस मुद्दे को उठाया था." भारत सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. | इससे जुड़ी ख़बरें लंदन में जगन्नाथ यात्रा की झलकियाँ20 जून, 2004 | पहला पन्ना बिकनी में देवियों के बाद सैंडल में 'ऊँ'16 जुलाई, 2004 | पहला पन्ना 'हरे कृष्णा' अनुयाइयों में डर और रोष12 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना स्वास्तिक पर प्रतिबंध का विरोध17 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना अमरीकी राज्य सीनेट में हिंदू मंत्रोच्चार08 मई, 2007 | पहला पन्ना शाकाहारी को मांसाहार परोसने पर मुआवज़ा09 जून, 2007 | पहला पन्ना अमरीकी संसद में भी गूँजे वैदिक मंत्र13 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना व्हाइट हाउस में दीवाली समारोह08 नवंबर, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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