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व्हाइट हाउस में दीवाली समारोह | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यह देखकर सुखद आश्चर्य होता है कि अमरीका सरकार भी दीवाली जैसे पर्व और त्यौहारों पर लोगों की भावनाओं का औपचारिक रूप से आदर करती है और यह परंपरा अब पाँच साल पुरानी हो गई है. अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस में हर साल बाक़ायदा दीवाली समारोह मनाया जाता है और इस साल यानी नवंबर 2007 में व्हाइट हाउस में पाँचवाँ दीवाली वार्षिक समारोह हुआ जिसमें विदेश उपमंत्री निकोलस बर्न्स ने विशेष संदेश के ज़रिए दीवाली की शुभकामनाएँ दीं. सुनिए उन्हीं की ज़ुबानी... देवियों और सज्जनों, नमस्कार. व्हाइट हाउस में वार्षिक दीवाली समारोह में भाग लेते हुए मैं ख़ुद को सम्मानित महसूस कर रहा हूँ. यहाँ जो मेहमान विराजमान हैं उनमें बहुत से मेरे मित्र भी हैं, ख़ासतौर से मैं मंत्री पॉलसन का ज़िक्र करना चाहूँगा जो हाल ही में भारत का दौरा करके लौटे हैं. दुनिया भर में रहने वाले भारतीय लोगों के लिए दीवाली हर साल बहुत महत्वपूर्ण अवसर होता है और व्हाइट हाउस में इस पाँचवें दीवाली समारोह में भाग लेते हुए मैं ख़ुद गौर्वान्वित महसूस कर रहा हूँ. मैं अमरीका-भारत संबंधों को और मज़बूत बनाने की कोशिशों के तहत अपना काफ़ी समय व्यतीत कर रहा हूँ लेकिन मुझे अफ़सोस है कि इसके बावजूद मैं भारत में दीवाली समारोह में हिस्सा नहीं ले सका हूँ. मैं समझता हूँ कि दीवाली का संबंध हिंदुओं की पवित्र ग्रंथ रामायण से है लेकिन अब यह लगभग पूरे भारत में मनाई जाती है और इस अवसर पर दिये जलाने के साथ-साथ पटाख़ों छु़ड़ाकर उत्साह दिखाया जाता है. मेरा विचार है कि दीवाली में ऐसे मूल्य छुपे हुए हैं जिनके ज़रिए अमरीका और भारत के बीच सांस्कृतिक पुल बनाया जा सकता है. इसलिए मैं इस बारे में भी कुछ शब्द कहना चाहूँगा. चूँकि अमरीका-भारत संबंधों पर अपनी सरकार की राजनीतिक गतिविधियों में नज़दीकी से जुड़ा हुआ हूँ इसलिए मैं राजनीति और लोकतंत्र के बारे में कुछ शब्द कहना चाहूँगा जो हमारे बढ़ते सांस्कृतिक और निजी क्षेत्र के संबंधों की नींव मज़बूत कर रहे हैं. दीवाली समारोह के साथ जुड़ी हुई इस कहानी ने मुझे सचमुच बहुत प्रभावित किया कि यह त्यौहार राम और सीता की अयोध्या वापसी को याद करने के लिए मनाया जाता है. यह यात्रा बुराई का प्रतीक कहे जाने वाले रावण का नाश करने के बाद राम की अयोध्या वापसी के तौर पर प्रसिद्ध है. राम इस लड़ाई में अपनी पत्नी सीता को भी रावण के चंगुल से बचाते हैं और फिर ख़ुशी-ख़ुशी अपनी शासन नगरी अयोध्या लौटते हैं और लोग दिये जलाकर उनका स्वागत करते हैं. प्रतीकात्मक महत्व दीवाली का त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है. यह याद रखने की बात है क्योंकि इसमें अच्छाई, अच्छे कामों और दुष्टों पर जीत हासिल करने का संदेश शामिल है. ये एक ऐसी बात है जिसका आश्चर्यजनक रूप से शाश्वत महत्व है क्योंकि हममे से हर एक को कभी ना कभी किसी दुष्ट का सामना करना पड़ता है.
दूसरी बात जो मैंने दीवाली से सीखी है कि यह भारतीय संस्कृति और जीवन में बहुत गहरी पैठ बना चुकी है जिसे देखकर आश्चर्य होता है. एक ही कहानी को अलग-अलग तरह से कहे जाने के बावजूद भारतीय लोगों के दिलों में इसने मज़बूती से घर कर लिया है और इस कहानी के चरित्रों में छुपे मूल्यों और संदेशों को अमिट बना दिया है. हर आदमी इस कहानी को किसी न किसी रूप में अवश्य जानता है. मेरे विचार में यह बहुत ही अदभुत कहानी है. इस दंतकथा के अनेक रूप हो सकते हैं लेकिन उन सबका मूल संदेश एक ही है. दीवाली सांस्कृतिक बहुलवाद का एक जीता-जागता उदाहरण है जो वास्तव में इतने महान स्तर पर मनाई जाती है और इसी से भारत एक लोकतांत्रिक बहुलवाद की अदभुत मिसाल है. ये ऐसे महत्वपूर्ण मूल्य हैं जिसमें अमरीकी और भारतीय लोग बराबर के भागीदार हैं. भारत और अमरीका के संबंधों में भी एक ख़ास बात यही झलकती है और यह हमारे समाजों में भी झलकती है. अमरीका में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों के ज़रिए दीवाली के मूल्य और संदेश अमरीका में भी प्रखर हो रहे हैं और इसी के तहत व्हाइट हाउस में यह पाँचवाँ दीवाली समारोह आयोजित किया गया है. इससे भारतीय मूल के लोगों का अमरीकी समाज में योगदान और अहमियत भी झलकती है. मैं इस दीवाली समारोह में आने के लिए आप सबका धन्यवाद करता हूँ और आपको सपरिवार दीवाली की शुभकामनाएँ देता हूँ... | इससे जुड़ी ख़बरें धनतेरस की धूम:तस्वीरें देखिएभारत और पड़ोस कैसे मनाते हैं आप अपनी दीपावली?आपकी राय अमरीका परमाणु समझौते के लिए अडिग01 जून, 2007 | भारत और पड़ोस परमाणु समझौते पर मेनन से मिले बर्न्स 31 मई, 2007 | भारत और पड़ोस परमाणु सहमति : अमरीकी सांसद चिंतित03 मई, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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