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नोटों की छपाई और नंबर कैसे... | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लखनऊ उत्तर प्रदेश से गौरव श्रीवास्तव ने पूछा है कि नोटों की क्रम संख्या कैसे दी जाती है. हर वित्तीय वर्ष के शुरू में यह अनुमान लगाया जाता है कि किस वर्ग के कितने नोट छापे जाने हैं, कितने नोटों की आपूर्ति करनी है और कितने बदले जाने हैं. भारतीय रिज़र्व बैंक के पास चार प्रिंटिंग प्रैस हैं उनमें यह काम बांट दिया जाता है. किसी भी वर्ग के नोट एक करोड़ तक की संख्या में छापे जाते हैं. उसके बाद उस संख्या के आगे अंग्रेज़ी वर्णमाला के अक्षर जोड़ते जाते हैं. वर्णमाला के अक्षर का चयन बेतरतीब ढंग से किया जाता है. यह आमतौर पर कई साल के बाद दोहराया जाता है. कोमा की स्थिति में क्या होता है. यह सवाल लिख कर भेजा है अल्मोड़ा उत्तरांचल से रश्मि पंत ने. कोमा यूनानी भाषा का शब्द है जिसका मतलब है गहरी नींद. असल में कोमा में आदमी बेहोशी की हालत में रहता है. उसे जगाया नहीं जा सकता, उसे दर्द की अनुभूति नहीं होती, अगर उसकी आंखों पर रोशनी डाली जाए तो वह कोई प्रतिक्रिया नहीं करता, वह किसी तरह की कोई स्वैच्छिक हरकत नहीं करता. कोमा की स्थिति कुछ दिनों से लेकर कुछ सप्ताह तक रह सकती है जिसके बाद कुछ को होश आ जाता है, कुछ निष्क्रिय स्थिति या वैजिटेटिव स्टेट में चले जाते हैं और कुछ की मृत्यु हो जाती है. जो रोगी निष्क्रिय स्थिति में चले जाते हैं उनमें धीरे धीरे कुछ बोध लौट आता है और वो सालों तक ऐसी स्थिति में बने रहते हैं. कोई व्यक्ति कोमा से निकलेगा या नहीं यह कहना मुश्किल है लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि रोगी के स्नायु तंत्र को कितनी क्षति पहुंची है. नोएडा का पूरा नाम क्या है. यह सवाल पूछा है पूरब टोला बलरामपुर से धर्मेंद्र प्रसाद शुक्ल. नोएडा का पूरा नाम है न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डिवेलपमेंट अथॉरिटी. इसकी स्थापना 19 अप्रैल 1976 को संजय गांधी ने की थी. पहले यह बुलंदशहर ज़िले में पड़ता था. फिर उसे ग़ाज़ियाबाद में शामिल किया गया. जब मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं तो उन्होंने उसे अलग ज़िला घोषित कर दिया. फिर मुलायम सिंह सरकार ने उसे ग़ाज़ियाबाद में शामिल कर दिया. लेकिन अब वह गौतम बुद्ध नगर नाम से अलग ज़िला है. नोएडा में कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कार्यालय हैं, शॉपिंग मॉल हैं, कार बनाने वाली कई कंपनियों की इकाइयाँ हैं, फ़िल्म सिटी है, प्रमुख समाचार टेलीविज़न चैनलों के कार्यालय हैं, कई बड़े अस्पताल हैं, उच्च शैक्षणिक संस्थाएं हैं और बहुत कुछ है. अनिल कुमार सिंह पूछते हैं कि मुलायम सिंह यादव कहाँ के रहने वाले हैं. समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव का जन्म 22 नवम्बर 1939 को उत्तर प्रदेश के इटावा शहर में हुआ था. वो शुरू से ही समाज में व्याप्त असमानताओं के प्रति संवेदनशील थे और उनपर समाजवादी नेता डॉ राममनोहर लोहिया की विचारधारा का काफ़ी प्रभाव रहा. उन्होंने 1967 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर विधान सभा का पहला चुनाव जीता था. वो लोक दल के अध्यक्ष रहे. फिर 1992 में उन्होंने अपनी अलग पार्टी, समाजवादी पार्टी का गठन किया. वो दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. नील आर्मस्ट्रॉंग के बाद कितने अंतरिक्ष यात्री चाँद पर जा चुके हैं. इलाहबाद उत्तर प्रदेश से रजत यादव. अब तक कुल 24 अंतरिक्षयात्री अपोलो अंतरिक्ष यान में चंद्रमा की यात्रा कर चुके हैं लेकिन कुल बारह को चंद्रमा पर उतरकर चलने का अवसर मिला. ये सभी यात्राएं 1968 और 1972 के बीच हुईं. जिसके बाद से किसी अंतरिक्ष यात्री ने चंद्रमा पर क़दम नहीं रखा है. जर्मनी से विवेक कुमार श्रीवास्तव जानना चाहते हैं कि रेलवे की पटरियों के बीच में और आस पास पत्थर क्यों बिछाए जाते हैं. इसलिए जिससे कि पटरियों को एक समतल आधार मिल सके, दूसरा जब भारी भरकम ट्रेन पटरियों पर होकर गुज़रे तो पटरियां इधर उधर न खिसकें और तीसरा बारिश का पानी पत्थरों से होकर बह जाए. हमें कोई भी ध्वनि कैसे सुनाई देती है. यह सवाल किया है मंसूर नगर, लखनऊ उत्तर प्रदेश के मोहम्मद आज़म क़ुरैशी ने. इसके लिए कान की संरचना समझनी होगी. कान का बाहरी हिस्सा जो हमें दिखाई देता है. वह ध्वनि तरंगों को पकड़ने का काम करता है. फिर ये ध्वनि तरंगे कान की नली में पहुंचती हैं और कान के पर्दे को आंदोलित करती हैं. कान का पर्दा 10 मिलिमीटर की बहुत पतली सी त्वचा होती है जो कान की नली और मध्य कान के बीच स्थित होती है. यह बड़ी संवेदनशील होती है इसलिए हल्की सी हल्की तरंग से भी आंदोलित हो जाती है. इसके कांपने से मध्य कान की कई नन्हीं-नन्हीं हड्डियों में गति पैदा होती है, जो इस कंपन को भीतरी कान की द्रव्य युक्त नलिका में पहुंचा देती हैं. इस नलिका का द्रव्य, नलिका के भीतर मौजूद नन्हें-नन्हें बालों को आंदोलित करती है. ये बाल हमारी सुनने वाली नाड़ियों से जुड़े होते हैं जो हमारे मस्तिष्क को संकेत पहुंचाने का काम करती हैं. और हमारा मस्तिष्क उस ध्वनि तरंग को पहचानने का काम करता है. और तब पता चलता है कि ध्वनि किसकी है.
गोलपहाड़ी जमशेदपुर से जंगबहादुर सिंह और उमा सिंह ने पूछा है कि ब्लू टूथ डिवाइस क्या होती है. ब्लू टूथ आंकड़ा संचार की एक तकनीक है. इसमें हम एक उपकरण से दूसरे उपकरण पर डेटा स्थानांतरित कर सकते हैं. इसमें किसी तार का इस्तेमाल नहीं किया जाता. इसमें जो तकनीक इस्तेमाल की जाती है उसे कम फैलाव वाला रेडियो लिंक कहते हैं. यानी रेडियो फ़्रीक्वेंसी के ज़रिए डेटा ट्रांसफ़र होता है. इसमें आंकड़े, आलेख, फ़ोटो सभी प्रकार के डेटा का स्थानांतरण किया जा सकता है. मोबाइल फ़ोन में ब्लू टूथ प्रणाली लगी रहती है. आपने देखा होगा कि लोग बिना किसी तार के बात करते रहते हैं जबकि उनका मोबाइल कहीं अंदर होता है. एक मोबाइल से कोई डेटा दूसरे मोबाइल पर स्थानांतरित किया जा सकता है बशर्ते कि दोनों मोबाइलों पर ब्लू टूथ प्रणाली हो. गांव माइलु, कार्बिआंगलंग, असम से लक्ष्मी नारायण अधिकारी पूछते हैं कि हाल में पृथ्वी के अनुरूप जो पृथ्वी जैसा ग्रह मिला है इसकी खोज किसने की और पृथ्वी से इसकी क्या दूरी है. इसकी खोज किसी एक वैज्ञानिक ने नहीं बल्कि यूरोपीय वैज्ञानिकों के एक दल ने की. इस खोज की रिपोर्ट लिखने वाले दल के प्रमुख स्टीफ़ेन ऊद्री ने बताया कि खोजे गए इस नए ग्रह का घेरा पृथ्वी से डेढ़ गुना बड़ा है. अनुमान है कि इसका तापमान शून्य से 40 डिग्री सेल्सियस के क़रीब होगा जिसका मतलब ये हुआ कि यहां पानी तरल रूप में होना चाहिए. इसकी ज़मीन पथरीली और समुद्रों से भरी होगी. यह ग्रह, ग्लीस 581 तारे के चारों ओर चक्कर लगाता है जो हमसे 20.5 प्रकाश वर्ष दूर है. एक साल में रोशनी की किरण कितनी दूरी तय करती है उसी को प्रकाश वर्ष कहते हैं. जो है लगभग 94 खरब 60 अरब किलोमीटर. यहां ये भी बता दें कि इस ग्रह को अपने सूर्य का चक्कर लगाने में कुल 13 दिन लगते हैं. यह पृथ्वी की तुलना में अपने सूर्य से 14 गुना पास है. लेकिन क्योंकि इसका सूर्य छोटा और अपेक्षाकृत ठंडा है इसलिए इसका तापमान जीवन के उपयुक्त है. धरती के नीचे से जो पानी निकलता है वह सर्दियों में गर्म और गर्मियों में ठंडा क्यों होता है. यह सवाल किया है गांव दौलतपुर, फ़तेहाबाद हरियाणा से रामनिवास दूधवाल ने. असल में धरती के नीचे से निकलने वाला पानी एक जैसा ही होता है, लेकिन सर्दी में क्योंकि बाहरी तापमान काफ़ी कम होता है इसलिए वह हमें गर्म महसूस होता है और गर्मियों में तापमान अधिक होता है इसलिए पानी ठंडा लगता है. क्या दसवीं पास व्यक्ति भारत का राष्ट्रपति बन सकता है. यह जानना चाहते हैं गांव जांटवाली, झुंझुनू राजस्थान से बिहारी लाल सैनी. राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने के लिए कोई न्यूनतम शैक्षिक योग्यता निर्धारित नहीं है. भारत के संविधान के अनुसार कोई भी भारतीय नागरिक जो 35 वर्ष या उससे ऊपर है राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार हो सकता है. लेकिन वह सरकार के अधीन किसी लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए. वर्तमान उप राष्ट्रपति, किसी राज्य का गवर्नर या केंद्र या राज्य में मंत्री भी इस पद का उम्मीदवार नहीं हो सकता. |
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