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मिर्च से पसीना क्यों... | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मिर्च खाकर हमें पसीना क्यों आता है. राजगीर, नालन्दा बिहार से यह सवाल किया है वीरेंद्र ने. पहली बात ये कि पसीना, शरीर के तापमान को कम करने का एक प्राकृतिक तरीक़ा है. हमारे शरीर का सामान्य तापमान है 98.6 डिग्री फ़ॉरेनहाइट या 37 डिग्री सैल्सियस. जहाँ तक मिर्च का सवाल है उसका तीखापन कैप्सेसिन नामक तत्व के कारण होता है. जब हम मिर्च वाला खाना खाते हैं तो कैप्सेसिन की प्रतिक्रिया में हमारे शरीर का तापमान बढ़ जाता है और उसे ठंडा करने के लिए पसीने की ग्रंथियाँ सक्रिय हो उठती हैं और हमें पसीना आने लगता है. मंगल ग्रह पर हवा है कि नहीं, यह जानना चाहते हैं कुवैत से दिलीप लश्करी. विभिन्न गैसों के मिश्रण को आम ज़बान में हवा कहा जाता है और गैसों की इसी परत से किसी भी ग्रह का वायुमंडल बनता है. मंगल ग्रह का भी वायुमंडल है लेकिन उसमें 95 प्रतिशत से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड है, केवल .13 प्रतिशत ऑक्सीजन, .03 प्रतिशत पानी, 2.7 प्रतिशत नाइट्रोजन, 1.6 प्रतिशत आरगॉन और बहुत ही सूक्ष्म मात्रा में नियॉन गैस है. जबकि पृथ्वी पर 78 प्रतिशत नाइट्रोजन और 20.95 प्रतिशत ऑक्सीजन है और कार्बन डॉइऑक्साइड की मात्रा केवल .038 प्रतिशत, आरगॉन की .93 प्रतिशत और एक प्रतिशत जल वाष्प और अन्य गैसें हैं. विकिपीडिया क्या है. पूछते हैं रहमान गंज किशन गंज बिहार से नारायण कुमार सिंह. विकिपीडिया इंटरनेट पर उपलब्ध निशुल्क विश्वकोश है जिसे इंटरनेट उद्यमी जिमी वेल्स और लैरी सैंगर ने शुरू किया था. अंग्रेज़ी में इसे 15 जनवरी 2001 में शुरू किया गया और आज ये दुनिया की अनेक भाषाओं में उपलब्ध है. इस परियोजना की विशेषता यह है कि इसमें कोई भी अपना योगदान कर सकता है और उपलब्ध सामग्री का संपादन कर सकता है. इसलिए इसकी विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए जाते रहे हैं लेकिन क्योंकि इसे पढ़ने वाले अनेक हैं इसलिए भूल सुधार भी जल्दी हो जाते हैं. इस परियोजना को जिमी वेल्स का विकिमीडिया फ़ाउन्डेशन चला रहा है जो एक लाभ निरपेक्ष संस्था है. सैदपुर भागलपुर बिहार से दीपक कुमार ने पूछा है कि मोबाइल फ़ोन का आविष्कार कब हुआ.
डॉक्टर मार्टिन कूपर को मोबाइल फ़ोन का आविष्कारक माना जाता है. वह मोटरोला कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर हुआ करते थे जब उन्होंने न्यूयॉर्क में एक बेस स्टेशन स्थापित किया और तीन अप्रैल 1973 को न्यूयॉर्क के मैनहैटन इलाक़े में खड़े होकर, पहली मोबाइल फ़ोन कॉल की और वो भी अपने प्रतिद्वंद्वी जोएल ऐंजिल को, जो एटीएनटी कंपनी के अनुसंधान विभाग, बैल लैब्स के प्रमुख थे. दरसल बैल लैब्स ने मोबाइल दूर संचार का विचार 1947 में रखा था. और जानते हैं, जिस मोबाइल फ़ोन का डॉक्टर कूपर ने इस्तेमाल किया वह ईंट जितना बड़ा और कोई एक किलोग्राम वज़न का था. बाद में डॉ कूपर ने बताया कि साई फ़ाई टेलीविज़न सीरियल, स्टार ट्रैक के पात्र कैप्टन कर्क को मोबाइल उपकरण पर बात करते हुए देखकर उन्हें, इसे बनाने की प्रेरणा मिली थी. बायोडीज़ल का आविष्कार किसने किया. इसकी विस्तार से जानकारी दीजिए. यह लिखा है अशोक कुमार ठाकुर ने, ग्राम मालीटोला दरभंगा बिहार से. डीज़ल इंजन का आविष्कार किया था जर्मनी के इंजीनियर रूडॉल्फ़ डीज़ल ने. उन्हीं के नाम पर इस इंजन का नाम रखा गया. इस इंजन में जो ईंधन इस्तेमाल होता था वह बायो डीज़ल या जैव ईंधन ही था. लेकिन उसके बाद जीवाश्म ईंधन आ गया और 1920 के बाद से तेल उत्पादों का इस्तेमाल होने लगा. आज हम जिसे बायो डीज़ल के नाम से जानते हैं उसे मान्यता मिली 1977 में. ब्राज़ील के एक वैज्ञानिक ने गले सड़े पौधों से यह ईंधन बनाया और ईथेनॉल और अल्कोहल के साथ मिलाकर इसका इस्तेमाल शुरू किया. इस समय बायो डीज़ल का इस्तेमाल पैट्रोलियम डीज़ल के साथ मिलाकर हो रहा है जिससे प्रदूषण में कमी आई है. पटना बिहार के राजेश कुमार ने पूछा है कि भारत का राष्ट्रीय पेड़ कौन सा है, बरगद या अशोक. भारत का राष्ट्रीय पेड़ बरगद है. यह एक विशाल पेड़ होता है जो लंबे समय तक जीवित रहता है. इसे अमर माना जाता है इसीलिए यह भारतीय मिथकों का एक अभिन्न अंग रहा है. इसकी विशेषता यह है कि इसकी शाखाएं दूर-दूर तक फैलती हैं और फिर ज़मीन में जड़ें जमा लेती हैं. केबाला, कटिहार बिहार से शाहिद नक्काश ने लिखा है कि दुनिया भर के मुसलमान इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल काबा की तरफ़ मुंह करके नमाज़ पढ़ते हैं और हज की परिक्रमा करते हैं, इसका निर्माण कब और किसने किया. काबा मक्का शहर में बनी एक चौकोर इमारत है जो मस्जिद अल हरम से घिरी हुई है और इसे इस्लाम का केंद्र माना जाता है. मुसलमान दुनिया के किसी भी कोने में हों काबा की तरफ़ मुंह करके ही नमाज़ पढ़ते हैं. इस्लाम में यह मान्यता है कि अल्लाह ने आदम और हव्वा को हुक्म दिया कि वो इस जगह पर काबे का निर्माण करें लेकिन नूह के सैलाब में यह टूट गया. उसके बाद हज़रत इब्राहीम ने अपने बेटे हज़रत इस्माईल के साथ मिल कर इसका निर्माण किया. यह एक कमरा सा है जिसका एक द्वार है जिसे बाबे काबा कहते हैं और साथ में एक पत्थर है जिसे काला पत्थर या हिज़्रे असवद कहते हैं. जब लोग काबे की परिक्रमा करते हैं तो उसकी शुरूआत इसी पत्थर को चूमकर, छूकर या फिर उसकी तरफ़ हाथ बढ़ाकर की जाती है. |
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