|
बर्मा में स्थिति बेहतर हो रही है:गंबारी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत इब्राहीम गंबारी ने बर्मा से लौटकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को बताया है कि पिछले कुछ हफ़्तों में वहाँ स्थिति बेहतर हो रही है. उधर संयुक्त राष्ट्र में अमरीका के राजदूत ज़ल्मय ख़लीलज़ाद ने कहा है कि उनका देश संतुष्ट नहीं है और अमरीका नहीं मानता कि बर्मा के सैन्य शासकों की सोच में कोई मूलभूत बदलाव आया है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को पेश की गई अपनी रिपोर्ट में गंबारी ने बताया कि उन्हें वे सभी नतीजे नहीं मिले हैं जिनकी उन्हें उम्मीद थी लेकिन उनका ये भी कहना था कि बर्मा की सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव का असर हो सकता है. बर्मा में बौद्ध भिक्षुओं के प्रदर्शनों के बाद गंबारी दो बार वहाँ की यात्रा कर चुके हैं. 'सू ची को रिहा करें' गंबारी का कहना था कि पिछले चार साल में पहली बार विपक्ष की नेता आंग सान सू ची को बयान देने की इजाज़त दी गई है और उन्हें अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से मिलने दिया गया है. गंबारी ने सुरक्षा परिषद को बताया, "मैनें बर्मा की सरकार से ज़ोर देकर कहा है कि अपनी बातचीत के ज़रिए संकट सुलझाने के बारे में प्रतिबद्धता दिखाने का तरीका है कि वे आंग सान सू ची को बिना देरी के रिहा करें ताकि वे पूरी तरह से बातचीत में भाग ले सकें." ग़ौरतलब है कि गंबारी बर्मा की अपनी दूसरी यात्रा के दौरान विपक्ष की नेता और लोकतंत्र समर्थक आंग सान सू ची से नहीं मिल पाए. हालाँकि उन्होंने पेशकश की थी कि उनकी सू ची के साथ बैठक में सैन्य नेता भी मौजूद हो सकते हैं. गंबारी ने कहा कि अपनी दूसरी बैठक में वह बर्मा के सैन्य शासक जनरल थान श्वे को से भी नहीं मिल पाए. मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने बर्मा की सैन्य सरकार और विपक्षी दलों से अनुरोध किया था कि वे राष्ट्रीय स्तर पर मैत्रीपूर्ण माहौल बनाने के प्रयास तेज़ करें. उन्होंने एक बयान में कहा था कि सितंबर में सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरु होने से पहले देश में जिस तरह की व्यवस्था थी, उसे दोबारा क़ायम कर, ज़्यादा देर तक चलाया नहीं जा सकता. | इससे जुड़ी ख़बरें दमन की जाँच के लिए बर्मा पहुँचे दूत11 नवंबर, 2007 | पहला पन्ना सू ची पार्टी के सदस्यों से मिलीं09 नवंबर, 2007 | पहला पन्ना गम्बारी दूसरी बार बर्मा पहुँचे03 नवंबर, 2007 | पहला पन्ना बर्मा की सेना में 'बच्चों की भर्ती'31 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना बर्माः लोकतंत्र की राह आसान नहीं है23 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना बर्मा में अशांति: एक छात्र की नज़र से 06 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||