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शुक्रवार, 02 नवंबर, 2007 को 15:54 GMT तक के समाचार
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बम गिराने वाले पायलट का निधन
जनरल पॉल टिब्बेट्स
जनरल टिब्बेट्स (बीच में सिगार पीते) हमेशा कहते रहे कि उन्हें किए पर कोई पछतावा नहीं है
दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान जापान पर पहला परमाणु बम गिराने वाले बी-29 विमान के चालक दल के सदस्य ब्रिगेडियर जनरल पॉल डब्लयू टिब्बेट्स नहीं रहे.

92 साल के टिब्बेट्स ने अमरीकी राज्य ओहियो की राजधानी कोलंबस में आख़िरी साँसें ली.

हिरोशिमा पर छह अगस्त, 1945 की सुबह पाँच टन वज़न वाला 'लिटिल ब्वॉय' बम गिराया गया था. इसके क़हर से 1.40 लाख जापानियों की मौत हो गई थी. इसके असर से मरने का सिलसिला बाद में दिनों में भी जारी रहा.

हिरोशिमा बमकांड की 60वीं बरसी पर उस लड़ाकू विमान 'इनोला गे' के जीवित बचे चालक दल के तीन सदस्यों ने कहा था कि उन्हें बम गिराने का कोई अफ़सोस नहीं है. टिब्बेट्स की माँ के नाम पर उस बी-29 विमान का नाम 'इनोला गे' रखा गया था.

'कोई शिलालेख नहीं'

टिब्बेट्स के एक मित्र ने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि दो महीने से उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता जा रहा था.

उनके मित्र गेरी न्यूहाउस ने बताया कि टिब्बेट्स ने अपने अंतिम संस्कार और किसी भी तरह के शिलालेख के लिए मना किया है. टिब्बेट्स को आशंका थी कि बम गिराने के विरोधी उस जगह को विरोध के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं.

हिरोशिमा पर क़हर
हिरोशिमा में गिराया गया बम क़रीब 1.40 लाख लोगों की मौत का कारण बना

हिरोशिमा पर बम हमले के बाद प्रशांत क्षेत्र में ज़ंग थमने लगा. तीन दिन बाद नागासाकी पर दूसरा बम गिराने के कुछ दिन बाद ही जापान ने हथियार डाल दिए.

हिरोशिमा की 60वीं बरसी पर 'इनोला गे' के ज़िंदा बचे चालक दल के सदस्य जनरल टिब्बेट्स, थियोडोर जे वान किर्क और मोरिस आर जेप्पसन ने कहा था, "परमाणु हथियार का इस्तेमाल इतिहास में एक ज़रूरी पल था. हमें कोई ख़ेद नहीं है."

जनरल टिब्बेट्स ने तब कहा था, "हज़ारों पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों ने निजी तौर पर भावुक रूप से इस बात को माना है कि अगर बम नहीं गिराया गया होता तो वे शायद ज़िंदा नहीं होते."

हवा का सफ़र

जनरल टिब्बेट्स का 1915 में इलियोनिस प्रांत के क्विंसी में जन्म हुआ था. उन्होंने अपनी युवा ज़िंदगी का ज़्यादातर वक़्त मियामी में बिताया.

अमरीकी वायुसेना में 1937 में शामिल होने के बाद यूरोप में बमबारी के अभियानों की अगुवाई की. 1966 में वे रिटायर हो गए.

1975 में एक साक्षात्कार के दौरान जनरल टिब्बेट्स ने कहा था, "मुझे गर्व है कि मैं शून्य से शुरू करने, योजना बनाने और उसे अंजाम देने में सक्षम था और वैसा ही किया. और, ...मैं हर रात चैन से सोता हूं."

बम का विरोध
टिब्बेट्स का कहना था कि जापानी नुकसान को ज़्यादा तूल दिया जाता है लेकिन उसकी सेना की बर्बरता को नहीं

जनरल टिब्बेट्स 1976 में एक बार फिर आलोचनाओं से घिर गए. टिब्बेट्स ने टेक्सास की एक विमान प्रदर्शनी में दिखाया था कि 1945 में उन्होंने कैसे बम गिराया था.

उनका बी-29 विमान जैसे ही करतब दिखाता ऊपर उठा, वैसे ही आकाश को धुओं से भर दिया गया था. जनरल टिब्बेट्स ने कहा था कि इसमें अपमान जैसी कोई बात नहीं है लेकिन अमरीकी सरकार ने औपचारिक रूप से ख़ेद जता दिया है.

बम के असर को सामने लाने के लिए बमकांड की 50वीं बरसी पर स्मिथसोनियन संस्थान में एक प्रदर्शनी लगाई गई थी. जनरल टिब्बेट्स ने इस प्रदर्शनी को बहुत बड़ा अपमान मानते हुए इसकी तीखी भर्त्सना की थी.

जनरल टिब्बेट्स और पूर्व सैनिकों के समूहों का कहना रहा कि जापान की पीड़ा को ज़्यादा तूल दिया जाता है लेकिन उसकी सेना की क्रूरता को नहीं.

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