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कोई अफ़सोस नहीं बम गिरानेवालों को | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराने वाले विमान इनोला गे के चालक दल के तीन जीवित सदस्यों ने एक संयुक्त बयान जारी करके कहा है कि उन्हें बम गिराने का कोई अफसोस नहीं है. "दूसरे विश्व युद्ध को समाप्त हुए इस वर्ष पूरे 60 साल हो जाएँगे. 1945 की गर्मियाँ वास्तव में कठिनाइयों भरी थीं, जब अमरीका और उसके सहयोगी देशों की सेनाएँ जापान पर हमला करने के लिए संगठित हुईं. राष्ट्रपति ट्रूमैन ने एक अंतिम माँग, एक अंतिम अपील की. उन्होंने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री चर्चिल और रुस के स्तालिन के साथ मिल कर जापान से अनुरोध किया कि वो अपनी सेनाओं का बिना शर्त समर्पण करे या फिर भारी तबाही के लिए तैयार रहे. लेकिन जापान के प्रधानमंत्री बारोन कांतारो सुज़ुकी ने सैन्य स्थिति की अनदेखी करते हुए समर्पण से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि "आत्मसमर्पण की माँग को पूरी तरह से अस्वीकार करने के अलावा हमारे पास और कोई रास्ता नहीं है और हम युद्ध की समाप्ति तक कड़ा मुक़ाबला करेंगे". हालाँकि यह सही है कि हमारी तरफ से की गई कार्रवाई दुर्भाग्यपूर्ण थी, लेकिन उस समय सहयोगी देशों के पास इस कार्रवाई के अलावा और कोई चारा नहीं था. रक्षा सचिव हैनरी स्टीन्सन् का कहना है "परमाणु बम का इस्तेमाल करना हमारे लिए सबसे अंतिम उपाय था". राष्ट्रपति हैरी एस ट्रूमैन ने परमाणु बम के इस्तेमाल की अनुमति दी थी. यह उनका निर्णय था और उन्हें उम्मीद थी कि इससे जापान पर चढ़ाई करने की ज़रुरत नहीं रह जाएगी. जबकि जापान पर धावा बोलने की स्थिति में जापान और सहयोगी देशों के लाखों लोगों को जान से हाथ धोना पड़ता. विंस्टन चर्चिल ने इस निर्णय का समर्थन करते हुए कहा था कि"भारी तबाही को रोकने, युद्ध को समाप्त करने, विश्व शांति के लिए और कुछ विस्फोटों की लागत पर पीड़ितों के दुखों को कम करने के लिए, हमारे कड़े परिश्रम और जोख़िम के बाद मुक्ति का यह एक चमत्कारिक मार्ग लगता है". विवेकपूर्ण कार्रवाई
6 अगस्त 1945 को बी-29 एनोला गे विमान से हिरोशिमा द्वीप पर पहला परमाणु बम गिराया गया ताकि दूसरे विश्व युद्ध को जल्द समाप्त किया जा सके. तीन दिनों बाद नागासाकी पर बी-29 सुपरफोर्ट्रेस बॉक्स कार विमान ने दूसरा परमाणु बम गिराया. इन बमों की उपलब्धता के चलते राष्ट्रपति ट्रूमैन के पास इनके इस्तेमाल के अलावा और कोई उपाय नहीं था. दुनिया को एक वीभत्स हमले से बचाने और अमरीकी, सहयोगी देशों व जापानी लोगों की जान बचाने के लिये यही एक विवेकपूर्ण रास्ता था. एनोला गे विमान के चालकदल के जीवित सदस्यों, चालक पॉल.डब्लू तिब्बेत्स, सहचालक थियोडोर. जे. वॉन. किर्क और शस्त्र अधिकारी मॉरिस आर जैपसन ने बार-बार यह कहा है कि परमाणु हथियार का इस्तेमाल इतिहास का एक ज़रुरी हिस्सा था. हमें इसका कोई खेद नहीं है. ये लोग पिछले छह दशकों से अपने इस बयान पर क़ायम हैं. गौरवान्वित सेवा ब्रिगेडियर जनरल पॉल डब्ल्यू टिब्बेट्स का कहना है,"हिरोशिमा की घटना के बाद पिछले साठ वर्षों में मुझे दुनिया भर से लोगों के कई पत्र मिले हैं. इनमें से बहुत से पत्रों में इस बात पर आभार जताया गया है कि 509वीं संयुक्त कमान के 1700 सैनिकों, 15 बी-29 और 6 सी-54 विमानों ने उन बमों के गिराने में सफलता हासिल की जिनकी वजह से युद्ध का अंत हुआ". ब्रिगेडियर जनरल पॉल डब्ल्यू टिब्बेट्स कहते हैं कि इन बीते वर्षों में हज़ारों पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों ने दिल को छू लेने वाला यह एहसान जताया है कि यदि युद्ध को समाप्त करने के लिये जापान पर चढ़ाई का सहारा लिया जाता तो शायद वे आज ज़िन्दा नहीं होते. उनका आगे कहना है कि सेवा निवृत पूर्व अमरीकी सैनिकों के अलावा मुझे उन जापानी सैनिकों और नागरिकों ने भी धन्यवाद दिया है जिन पर अपनी मातृभूमि की रक्षा करते हुए मर जाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं था. अमरीका और सहयोगी देशों के संयुक्त प्रयासों से हम जनहानि को रोकने में सफल हुए. यह एक ऐसी भावना है जिसपर चालक दल के जीवित बचे सभी सदस्य एकमत हैं. वर्ष 2005 में हम एनोला गे की ऐतिहासिक लड़ाई की बरसी पर अपने घरों और दोस्तों का बीच होंगे. अपने पूर्व साथी सैनिकों और अमरीका के प्रति हम सब अपनी एक ही भावना व्यक्त करते है. "मैं प्रार्थना करता हूँ कि जब कभी भी भविष्य में परमाणु क्षमता के इस्तेमाल की ज़रुरत हमारे नेताओं को पड़े तो वे विवेक से काम लें. हमें कोई खेद नहीं है. हमें उन सभी लोगों की तरह गर्व है जो आज भी पूरी दुनिया में तैनात हैं. उन्हें और आपको हमारा सलाम”." |
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