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सू ची सैनिक शासन के प्रतिनिधि से मिलीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बर्मा में अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद लोकतंत्र समर्थक नेता आँग सान सू ची की मुलाकात एक वार्ताकार से कराई गई है. दूसरी ओर, चीन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि इब्राहिम गम्बारी से बातचीत में कहा है कि बर्मा पर प्रतिबंध लगाने की जगह उसके प्रति सकारात्मक रुख़ रखा जाना चाहिए. बर्मा की जानी-मानी नेता आँग सान सू ची 12 साल से नज़रबंद हैं और अगर बर्मा में वाक़ई लोकतंत्र की ओर कोई भी क़दम बढ़ाया जाना है तो उसमें आँग सान सू ची और उनकी पार्टी नेशनल लीग फ़ॉर डेमॉक्रेसी की अहम भूमिका होगी. बर्मा से जानकारी बड़ी मुश्किल से मिलती है लेकिन बीबीसी संवाददाता एंड्रू हार्डिंग का कहना है कि आज सू ची गाड़ी में बैठाकर अपने घर से रंगून के एक सरकारी गेस्टहाउस में ले जाया गया. एक घंटे से कुछ समय बाद उन्हें वापस अपने घर लाया गया. माना जा रहा है कि एक सरकारी वार्ताकार से सू ची की बात कराई गई है. जिस वार्ताकार से उनकी मुलाक़ात करवाई गई उसका नाम है आँग ची और समझा जाता है कि संयुक्त राष्ट्र के साथ बातचीत में ही आँग ची का नाम सुझाया गया था. जानकार कहते हैं कि सू ची का सरकारी वार्ताकार से बात करना कोई बड़ी उपलब्धि तो नहीं है लेकिन ये भी सच है कि कई दिनों तक अंतरराष्ट्रीय समुदाय की माँग को न मानने के बाद बर्मा की सैनिक सरकार ने बातचीत की ओर एक शुरुआती क़दम उठाया है. इस बीच, संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत इब्राहिम गम्बारी और चीनी के वरिष्ठ अधिकारी तांग जियाशुआन के बीच बातचीत हुई है. जानकार कहते हैं कि जहाँ पश्चिमी देश चीन से बर्मा पर दबाव बढ़ाने की बात करते रहे हैं वहीं चीन ने इसका ठीक उलट रवैया अपनाया लगता है. चीन ने कहा है कि बर्मा पर दबाव बढ़ाने और प्रतिबंध लगाने की बजाय उसकी सकारात्मक सहायता की जानी चाहिए. |
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