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बर्मा में बल प्रयोग, नौ की मौत | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बर्मा में सैनिक सरकार के सुरक्षा बलों ने सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर गुरूवार को बल प्रयोग किया जिसमें कम से कम नौ लोगों के मारे जाने की ख़बर है. बर्मा के सरकारी टेलीविज़न की ख़बरों के अनुसार यह बल प्रयोग रंगून शहर में हुआ और मारे गए लोगों में आठ प्रदर्शनकारी और एक पत्रकार बताया गया है. जापान की एपीएफ़ समाचार एजेंसी ने पुष्टि की है कि मारा गया जापानी व्यक्ति एक वीडियो पत्रकार था. इस बल प्रयोग में 11 प्रदर्शनकारी और 31 सैनिक घायल भी हुए हैं. यह बल प्रयोग प्रदर्शन के दसवें दिन किया गया है. इससे पहले गुरूवार को ही प्रदर्शनकारियों पर पुलिस फ़ायरिंग हुई थी और बौद्ध मठों पर छापेमारी में लगभग दो सौ बौद्ध भिक्षुओं को गिरफ़्तार किया गया था. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक गुरुवार को एक बार फिर राजधानी रंगून के बीचोबीच हज़ारों प्रदर्शनकारी इकट्ठा हुए साथ ही सेना और पुलिस के जवान भी भारी संख्या में तैनात हैं. ऐसी ख़बरें हैं कि बुधवार को प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प में पाँच लोग मारे गए. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बुधवार रात को ही बर्मा में सुरक्षा बलों ने कई बौद्ध मठों पर छापेमारी की है और लगभग दो सौ बौद्ध भिक्षुओं को गिरफ़्तार कर लिया है. पिछले महीने तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर बर्मा की सैनिक सरकार के ख़िलाफ़ शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब व्यापक रूप अख़्तियार करता जा रहा है और बौद्ध भिक्षुओं के प्रदर्शनों में लोकतंत्र की बहाली की माँग की जा रही है. इसे देखते हुए सैनिक सरकार ने पहले ही बौद्ध भिक्षुओं को कार्रवाई की चेतावनी दे दी थी लेकिन प्रदर्शन जारी है. उधर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बर्मा की सैनिक सरकार से संयम बरतने की अपील की है. अमरीका चाहता था कि बर्मा के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगा दिया जाए. छापेमारी प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बुधवार रात राजधानी रंगून के दो बौद्ध मठों में सुरक्षा बल घुस गए और वहाँ से लगभग दो सौ बौद्ध भिक्षुओं को गिरफ़्तार कर लिया गया.
एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि उन्होंने मठ में भारी शोरगुल और चीखने की आवाज़ें सुनीं. देश के पूर्वोत्तर हिस्सों में भी कई स्थानों पर छापेमारी की ख़बरें हैं. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बर्मा की सैनिक सरकार से ख़राब होते राजनैतिक हालातों के बीच संयम रखने को कहा है. सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक के बाद बर्मा के सैन्य अधिकारियों से यह अपील की गई कि वो संयुक्त राष्ट्र के विशेष राजदूत इब्राहिम गमबारी को बर्मा में प्रवेश करने से ना रोकें. प्रतिक्रिया अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय ने माँग की है कि बर्मा की सैनिक सरकार प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ सुरक्षा बलों की कार्रवाई को तुरंत रोके. भारतीय विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि बर्मा के सभी लोगों को राजनीतिक सुधारों की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए. उनका कहना था बर्मा के मौजूदा राजनीतिक हालात पर भारत चिंतित है और स्थिति पर लगातार नज़र रखे हुए है. प्रणव मुखर्जी ने कहा कि सभी पक्षों को मिलजुल कर वार्ता के ज़रिए समस्या का समाधान निकालना चाहिए. उधर चीन के विरोध के कारण संयुक्त राष्ट्र में बर्मा के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाने की कवायद आगे नहीं बढ़ सकी. संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत ने कहा कि प्रतिबंधों से बर्मा के हालात नहीं सुधरेंगे. | इससे जुड़ी ख़बरें संयुक्त राष्ट्र की बर्मा से संयम रखने की अपील 26 सितंबर, 2007 | पहला पन्ना अब बर्मा में विपक्षियों की धरपकड़26 सितंबर, 2007 | पहला पन्ना बर्मा पर भारत की दुविधा और चुप्पी26 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा में अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन23 सितंबर, 2007 | पहला पन्ना बर्मा में बौद्ध भिक्षुओं का प्रदर्शन18 सितंबर, 2007 | पहला पन्ना सुरक्षा परिषद में पहली बार बर्मा पर चर्चा29 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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