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बर्मा में अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बर्मा में पिछले बीस सालों में भिक्षुओं के नेतृत्व में सबसे बड़ा सरकार विरोधी प्रदर्शन हुआ है. इसमें नन ने भी हिस्सा लिया. लगातार सातवें दिन हुए इस प्रदर्शन में करीब बीस हज़ार लोगों ने हिस्सा लिया. इसमें तानाशाही को ख़त्म करने की माँग की गई. पिछले दिन के उलट, पुलिस ने भिक्षुओं को उस सड़क पर जाने से रोक दिया जो विपक्ष की नेता आंग सांग सू की के घर तक जाती है. हज़ारों प्रदर्शनकारी रंगून के बीचों-बीच आ गए, उसी रास्ते के ज़रिए जिसका इस्तेमाल 1988 में विफल सेना-विरोधी अभियान में किया गया था. रैलियाँ पिछले महीने शुरू हुए थे जब सरकार ने ईंधन के दाम दोगुने कर दिए थे. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि हर दिन प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है-छह दिन पहले कुछ भिक्षुओं ने ये अभियान शुरू किया था और अब लोग ख़ुले तौर पर सेना को चुनौती दे रहे हैं. आसियान के क्षेत्रीय प्रमुख ऑंग केंग यॉग ने एपी से कहा कि वे उम्मीद करते हैं कि बर्मा के अधिकारी प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ सख़्त क़दम नहीं उठाएँगे. बर्मा के बौद्ध भिक्षुओं के एक नए संगठन ने यह विरोध अभियान शुरु किया है जिसका नेतृत्व युवा वर्ग के चरमपंथी भिक्षु कर रहे हैं. इस संगठन के प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि उन्होने 1988 और 1990 में हुए प्रदर्शनों से सबक सीखा है जिन्हें सेना ने आसानी से दबा दिया था. लेकिन इस बार उनके नेता जोखिम नहीं उठाएंगे और छिपे रहेंगे. | इससे जुड़ी ख़बरें बर्मा पर मानवाधिकार हनन के आरोप29 जून, 2007 | पहला पन्ना दुनिया ने देखी बर्मा की नई राजधानी27 मार्च, 2007 | पहला पन्ना बर्मा ने रेड क्रॉस के दफ़्तर 'बंद' किए27 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना सुरक्षा परिषद में पहली बार बर्मा पर चर्चा29 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना बुश का बर्मा पर दबाव का आहवान18 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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