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सुरक्षा परिषद में पहली बार बर्मा पर चर्चा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका ने कहा है कि वह जल्दी ही बर्मा पर एक प्रस्ताव सुरक्षा परिषद में रखेगा. इससे पहले पहली बार सुरक्षा परिषद में बर्मा की स्थिति पर चर्चा हुई. संयुक्त राष्ट्र के राजनीतिक मामलों के अवरमहासचिव इब्राहिम गंबारी ने सदस्यों को बर्मा के बारे में जानकारी दी. पिछले चालीस साल से बर्मा सेना के अधीन है और पहली बार सुरक्षा परिषद में इसकी चर्चा को अंतरराष्ट्रीय समुदाय की बर्मा को लेकर चिंता का संकेत माना जा रहा है. इस महीने की शुरुआत में अमरीका ने अनुरोध किया था कि बर्मा को संयुक्त राष्ट्र में चर्चा के एजेंडे में शामिल किया जाए. अमरीका का कहना था कि मानवाधिकारों के उल्लंघन और आसपास के देशों में घुसपैठ और नशीली दवाओं के व्यापार के कारण बर्मा अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए ख़तरा बन गया है. हालांकि इससे सुरक्षा परिषद के कई सदस्य, ख़ासकर चीन, सहमत नहीं है. यदि अमरीका कोई प्रस्ताव रखता है तो इस पर तीखी बहस होने की संभावना है. हालांकि अमरीका फ़िलहाल तब तक कोई कार्रवाई नहीं करने जा रहा है जब तक कि इब्राहिम गंबारी एक बार फिर से बर्मा का दौरा नहीं कर लेते. संभावना है कि गंबारी नवंबर में वहाँ का दौरा करेंगे. माना जा रहा है कि अमरीका के प्रस्ताव में बर्मा के मानवाधिकार उल्लंघन के रिकॉर्ड की जाँच और लोकतंत्र समर्थक नेता आँग सान सू ची की रिहाई का ज़िक्र हो सकता है. उधर संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन के राजदूत एमिर जोन्स का कहना है कि अमरीकी प्रस्ताव बर्मा के लोगों की सहायता करने वाला होना चाहिए न कि सिर्फ़ बर्मा को दंडित करने वाला. | इससे जुड़ी ख़बरें आंग सान सू ची की हिरासत बढ़ाई 27 मई, 2006 | पहला पन्ना सू ची के लिए अन्नान का आग्रह23 अप्रैल, 2005 | पहला पन्ना बर्मा में आलोचना के बावजूद सम्मेलन17 फ़रवरी, 2005 | पहला पन्ना बर्मा का फीका शहीद समारोह19 जुलाई, 2003 | पहला पन्ना सूची की रिहाई कब?15 जून, 2003 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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