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बर्मा में प्रदर्शनकारी भिक्षुओं पर हमला | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बर्मा में सुरक्षा बलों ने मुख्य शहर रंगून में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठी चार्ज किया है और आँसू गैस के गोले छोड़े हैं. बर्मा की सैन्य सरकार- जुंटा के ख़िलाफ़ इस प्रदर्शन का नेत़त्व बौद्ध भिक्षु कर रहे हैं और सरकार कई दिनों से हो रहे इन प्रदर्शनों को तोड़ने की कोशिश कर रही है. मौक़े पर मौजूद लोगों का कहना है कि एक घटना में सैनिकों ने प्रदर्शनकारियों के सिर के ऊपर से गोलियाँ चलाईं जिसके बाद भीड़ अपने बचाव के लिए इधर-उधर भागने लगे. प्रदर्शनकारी भिक्षुओं के एक अन्य दल की लाठियों से बुरी तरह पिटाई की गई और उनके सिरों से ख़ून बहने लगा. कुछ भिक्षुओं को पास में ही खड़े ट्रकों में भरकर ले जाया गया. कुछ ख़बरो में यह भी कहा गया है कि सुरक्षा बलों के साथ झड़पों में एक भिक्षु की मौत भी हो गई है और अनेक घायल भी हुए हैं. ऐसी ख़बरें हैं कि रंगून में भिक्षुओं के छह बड़े मठों को सुरक्षा बलों ने घेर लिया है ताकि और ज़्यादा भिक्षु सैनिक सरकार के आदेशों को धता बताकर प्रदर्शन में शामिल होने के लिए ना जा सकें. उधर बर्मा के बंदरगाह शहर सित्तवे में प्रदर्शन में हज़ारों लोगों ने हिस्सा लिया है और उनमें से सैकड़ों लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया है. जिन दो लोगों को गिरफ़्तार किया गया है उनमें लोकतंत्र के लिए लड़ रहे वरिष्ठ नेता यू विन नाइंग हैं और दूसरे सुप्रसिद्ध हास्यकलाकार ज़गनार हैं. बर्मा में सरकार विरोधी प्रदर्शनों की गंभीर स्थिति के बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तुरंत बैठक बुलाए जाने का आहवान किया है. ब्रिटेन में सत्तारूढ़ लेबर पार्टी के सम्मेलन में ब्राउन ने कहा कि सारी दुनिया की नज़र बर्मा के हालात पर है और यूरोपीय संघ बर्मा की सैन्य सरकार के ख़िलाफ़ संभावित प्रतिबंधों पर विचार करने जा रहा है. प्रतिक्रियाएँ अनेक देशों ने बर्मा सरकार से संयम बरतने का अनुरोध किया है. बर्मा के पड़ोसी देश थाईलैंड ने वह बर्मा की स्थिति का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में आसियान ग्रुप देशों की बैठक में उठाने की इरादा कर रहा है.
ऑस्ट्रेलिया ने चीन और भारत से कहा है कि वह बर्मा के सैनिक नेताओं पर और ज़्यादा दबाव बनाएँ. जापान ने बर्मा की सैनिक सरकार से लोगों की भावनाओं को गंभीरता से समझने का अनुरोध किया है. यूरोपीय संघ की विदेश नीति के प्रमुख ज़ेवियर सोलाना ने कहा कि संघ ने बर्मा की सैनिक सरकार को आगाह कर दिया है कि अगर प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ सख़्ती बरती गई तो प्रतिबंध और कड़े कर दिए जाएंगे. फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन सहित यूरोपीय संघ के अनेक सदस्य देश बर्मा के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करने की माँग पहले की कर चुके हैं. अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश पहले ही बर्मा की सैनिक सरकार के ख़िलाफ़ आर्थिक प्रतिबंध और कड़े करने की बात कह चुके हैं. प्रदर्शन उल्लेखनीय है कि बर्मा में बोद्ध भिक्षुओं के नेतृत्व में हो रहा प्रदर्शन बुधवार को नौवें दिन में प्रवेश कर गया. बौद्ध भिक्षु सैन्य शासन समाप्त कर लोकतंत्र की स्थापना की माँग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं और अब आम लोग भी इन प्रदर्शनों से जुड़ रहे हैं. सैनिक शासन के ख़िलाफ़ पिछले 20 वर्षों में यह सबसे बड़ा और व्यापक प्रदर्शन है. अधिकारियों ने रंगून में रात से सुबह तक का कर्फ़्यू लगा दिया था और दिन में अधिकारी शहर में घूम-घूमकर लाउडस्पीकरों के जरिए लोगों को आगाह करते रहे कि वे विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा न लें. | इससे जुड़ी ख़बरें अब बर्मा में विपक्षियों की धरपकड़26 सितंबर, 2007 | पहला पन्ना रंगून में शाम से सुबह तक का कर्फ़्यू25 सितंबर, 2007 | पहला पन्ना बर्मा के ख़िलाफ़ नए प्रतिबंध लगेंगे24 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा में सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी22 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा में बौद्ध भिक्षु सड़कों पर उतरे21 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा में लोकतंत्र समर्थक नेता गिरफ़्तार26 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा में लोकतंत्र समर्थक गिरफ़्तार22 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस विद्रोहियों के ख़िलाफ़ भारत-बर्मा एकजुट15 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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