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बर्मा में बौद्ध भिक्षु सड़कों पर उतरे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बर्मा की राजधानी रंगून में शुक्रवार को लगातार चौथे दिन सैकड़ों बौद्ध भिक्षुओं ने सैनिक सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया. ये लोग तेल की क़ीमतें बढ़ाने का विरोध कर रहे हैं. 15 मिनट के प्रदर्शन के दौरान बौद्ध भिक्षु उपदेशों और प्रार्थनाओं का पाठ करते रहे. इस दौरान किसी भी तरह की हिंसा की ख़बर नहीं है. हालांकि पिछले महीने तेल की क़ीमतों में बढ़ोतरी और महंगाई के ख़िलाफ़ आयोजित विरोध प्रदर्शनों को सेना ने सख़्ती से दबा दिया था और प्रदर्शनकारियों के कई नेताओं को गिरफ़्तार कर लिया था. गिरफ़्तार प्रदर्शनकारियों में से अधिकतर लोकतंत्र समर्थक उस छात्र संगठन के सदस्य हैं जिसने 1988 में प्रजातंत्र की बहाली के लिए चले आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई थी. इससे पहले अमरीका और ब्रिटेन के राजदूतों ने बर्मा में बढ़ती राजनीतिक अशांति पर चिंता जताते हुए सुरक्षा परिषद से हस्तक्षेप की माँग की है. अभियान बर्मा की सैनिक सरकार ने 15 अगस्त को पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों को दोगुना करने की घोषणा की थी जिसके बाद से प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हुआ. भिक्षुओं ने इससे पहले सरकार के विरोध में कम से कम पाँच शहरों में फिर प्रदर्शन किए हैं लेकिन सित्वे में सुरक्षा बलों ने भिक्षुओं को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस का इस्तेमाल किया था. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कुछ भिक्षुओं की पिटाई हुई और कई को गिरफ़्तार किया गया था. उन्होंने देश भर में अपने अनुयायियों से कहा है कि सेना से जुड़े किसी भी व्यक्ति से दान दक्षिणा न ली जाए. बर्मा के बौद्ध भिक्षुओं के एक नए संगठन ने यह विरोध अभियान शुरू किया है जिसका नेतृत्व युवा वर्ग के भिक्षु कर रहे हैं. इस संगठन के प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने 1988 और 1990 में हुए प्रदर्शनों से सबक सीखा है जिसे सेना ने आसानी से दबा दिया था लेकिन इस बार उनके नेता जोखिम नहीं उठाएंगे और छिपे रहेंगे. | इससे जुड़ी ख़बरें बर्मा पर मानवाधिकार हनन के आरोप29 जून, 2007 | पहला पन्ना बर्मा में हैं तो बाल बचाइए!13 मई, 2007 | पहला पन्ना बर्मा ने रेड क्रॉस के दफ़्तर 'बंद' किए27 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना सू ची से मिले संयुक्त राष्ट्र अधिकारी11 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना सुरक्षा परिषद में पहली बार बर्मा पर चर्चा29 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना आंग सान सू ची की हिरासत बढ़ाई 27 मई, 2006 | पहला पन्ना बर्मा के लोकतंत्र समर्थको को वीसा नहीं16 अक्तूबर, 2004 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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