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रूस ने बनाया 'सबसे शक्तिशाली बम' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रूसी सेना ने हवा से गिराए जाने वाले एक बम का परीक्षण किया है. इस बम के बारे में दावा किया गया है कि यह सबसे शक्तिशाली पारंपरिक बम है. सात टन वज़न वाले इस बम से भीषण विस्फोट होता है और एक विशालकाय आग का गोला पैदा होता है. रुस के सरकारी टेलीविज़न ने इस बम की रिपोर्ट प्रसारित की है. रूस ने यह बम विस्फोट करके ताक़त दिखाने की कोशिश ऐसे समय में की है जब कई सामरिक मुद्दों पर अमरीका के साथ उसके रिश्ते तल्ख़ चल रहे हैं. सबसे शक्तिशाली रूसी टेलीविज़न ने कहा है कि यह इतिहास का सबसे ताक़तवर ग़ैर-परमाणुविक बम है. रूस ने इस बम को 'डैड ऑफ़ ऑल बम्स' कहा है और दावा किया है कि यह अमरीका के सबसे शक्तिशाली बम से चार गुना शक्तिशाली है जिसे अमरीका ने 'मदर ऑफ़ ऑल बम्स' नाम दिया हुआ है. टेलीविज़न ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इसमें सिर्फ़ सात टन विस्फोटक है जबकि अमरीकी बम में आठ टन विस्फोटक होता है. हालांकि रिपोर्ट में विस्फोटक का नाम नहीं बताया गया है लेकिन कहा गया है कि नैनो-टेक्नोलॉजी से विस्फोटक तैयार किया गया है. समाचार एजेंसी एपी के अनुसार अमरीकी बम में जहाँ 11 टन टीएनटी के बराबर विस्फोट क्षमता होती है वहीँ रूसी बम में 44 टन टीएनटी के बराबर विस्फोट क्षमता है. अमरीकी बम की तुलना में रूसी बम के विस्फोट का इलाक़ा दो गुना (300 मीटर) है. रूसी सेना ने कहा है कि यह बम परमाणु बम की तरह ताक़तवर है लेकिन इससे विकिरण जैसे किसी पर्यावरणीय नुक़सान का ख़तरा नहीं है. विश्लेषक मानते हैं कि रुस इस बम के विस्फोट के ज़रिए दुनिया में अपनी सैन्य शक्ति को एक बार फिर स्थापित करना चाहता है. | इससे जुड़ी ख़बरें रूस का शीतयुद्धकालीन अभ्यास फिर शुरू17 अगस्त, 2007 | पहला पन्ना 'बर्लिन की दीवार बना रहा है अमरीका'09 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना अमरीका को रूस की चेतावनी09 जून, 2007 | पहला पन्ना अमरीका मिसाइल योजना पर नहीं रुकेगा15 मई, 2007 | पहला पन्ना अमरीका ने पुतिन के आरोपों को नकारा10 फ़रवरी, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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