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रूस का शीतयुद्धकालीन अभ्यास फिर शुरू | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शीतयुद्ध के समय की याद ताज़ा करते हुए बमवर्षक लड़ाकू विमानों को गश्ती पर भेजना फिर शुरू कर दिया है. पुतिन का कहना है कि यह फ़ैसला अन्य देशों की सैन्य ताकत से उपजी चुनौतियों के मद्देनज़र लिया गया है. इस तरह की गतिविधियाँ 15 वर्ष पहले रोक दी गईं थी. यह क़दम ऐसे समय में उठाया गया है जब कुछ दिनों पहेल ही रूसी जंगी विमान अमरीकी प्रशांत द्वीप गुआम के 500 मील अंदर तक चले गए थे. पुतिन का कहना है, "हम स्थायी तौर पर यह सेवा शुरू करने पर सहमत हुए हैं. 1992 में रूस ने एकतरफ़ा तौर पर लंबी दूरी की हवाई पेट्रौलिंग पर रोक लगा दी थी लेकिन हमारा उदाहरण किसी और ने नहीं सीखा." उधर अमरीकी विदेश विभाग के प्रवक्ता सीन मैककॉरमैक का कहना था, "हम निश्चित रूप से उस स्थिति में नहीं हैं जैसा पूर्व सोविय संघ के साथ था." वो कहते हैं, "अगर रूस अपने कुछ पुराने विमानों को निकाल कर दोबारा उड़ाना चाहता है तो ये उनका फ़ैसला है." 15 साल पहले जंगी विमानों की उड़ानें रोकने के पीछे एक कारण यह भी था कि रूस इनके लिए इंधन ख़रीदने में सक्षम नहीं था. लेकिन अभी रूस के पास तेल की बिक्री से होने वाला पैसा है और बीबीसी संवाददाता के मुताबिक क्रेमलिन यह जताना चाहता है कि रूस अभी भी एक सैनिक ताकत है जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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