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शनिवार, 10 फ़रवरी, 2007 को 12:16 GMT तक के समाचार
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अमरीका ने पुतिन के आरोपों को नकारा
पुतिन
रूस समेत कई देशों के नेता म्यूनिख़ सम्मेलन में हिस्सा लेने आए हैं
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने आरोप लगाया है बल प्रयोग की अमरीकी नीति से परमाणु हथियारों की होड़ तेज़ हुई है. व्हाइट हाउस ने इन आरोपों को ग़लत बताया है.

वहीं व्हाइट हाउस ने इस बयान पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए पुतिन के आरोपों को ख़ारिज कर दिया.

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने आरोप लगाया है कि दुनिया के विवादों को सुलझाने के लिए बल प्रयोग की बुश प्रशासन की नीति विश्व को असुरक्षित बना रही है.

उन्होंने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर अमरीका की नीति परमाणु हथियार की होड़ को बढ़ावा दे रही है.

म्यूनिख़ में ग्लोबल सुरक्षा सम्मेलन में बोलते हुए पुतिन ने कहा कि अमरीका ने हर मायने में अपनी राष्ट्रीय सीमाओं का उल्लंघन किया है जिससे कोई भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा.

अमरीकी जवाब

अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस ने पुतिन के भाषण पर आश्चर्य और निराशा व्यक्त है.

बुश के एक प्रवक्ता ने कहा कि पुतिन के आरोप ग़लत हैं. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अमरीका रूस के साथ सहयोग जारी रखेगा.

कोसोवो के मुद्दे पर बोलते हुए व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि रूस इस मसले के ऐसे किसी हल का समर्थन नहीं करेगा जिसका सर्बिया और अल्बेनियाई मूल के लोग समर्थन न करते हों.

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सर्बिया पर कोई हल थोपना नहीं चाहिए. पुतिन का कहना था कि सिर्फ़ कोसोवो और सर्बिया के लोग ही इस समस्या को सुलझा सकते हैं.

अल्बेनियाई मूल के लोगों की माँग है कि उन्हें स्वतंत्रता दी जाए सबकि सर्बिया चाहता है कि उसकी संप्रभुता बरकरार रहे.

संयुक्त राष्ट्र के दूत ने इस बारे में जो प्रस्ताव रखा था उसे सर्बिया ने नकार दिया है.

ईरान का मुद्दा

 यहाँ हम जिसकी बात कर रहे हैं वो तकनीक बेहद संवेदनशील है और इसलिए ज़्यादा पारदर्शिता की ज़रूरत है. लेकिन ईरान पारदर्शिता बरतने में विफल रहा है और अगर आगे भी वो ऐसा करता है तो वो और भी अलग-थलग हो जाएगा
एंगेला मर्केल

इससे पहले जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल ने म्यूनिख़ सम्मेलन का उद्घाटन किया. ये सम्मेलन 1962 से हर वर्ष आयोजित किया जाता है.

अपने भाषण में मर्केल ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने का अंतरराष्ट्रीय समुदाय का इरादा मज़बूत है.

जर्मन चांसलर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और आईएईए की बात मानने के अलावा ईरान के पास दूसरा रास्ता नहीं है.

उनका कहना था,"यहाँ हम जिसकी बात कर रहे हैं वो तकनीक बेहद संवेदनशील है और इसलिए ज़्यादा पारदर्शिता की ज़रूरत है. लेकिन ईरान पारदर्शिता बरतने में विफल रहा है और अगर आगे भी वो ऐसा करता है तो वो और भी अलग-थलग हो जाएगा."

इस सम्मेलन में विश्व भर से करीब 250 सुरक्षा विशेषज्ञ और अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं और इसमें ईरान के परमाणु वार्ताकार अली लारीजानी भी शामिल हैं.

माना जा रहा है कि यूरोप के राजनयिक अली लारीजानी के साथ अनौपचारिक बातचीत करेंगे.

ईरान पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा सीमित प्रतिबंध लगाए जाने के बाद इस तरह की ये पहली मुलाकात होगी.

शुक्रवार को आईएईए ने कहा था कि ईरान से जुड़ी कई योजनाओं को उसने स्थगित कर दिया है.

आईएईए की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान से जुड़ी करीब 22 तकनीकी योजनाओं को स्थगति कर दिया गया है ताकि संयुक्त राष्ट्र द्वारा लगाए प्रतिबंधों का पालन किया जा सके.

आईएईए कृषि और ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल के लिए कई देशों की मदद करता है.

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