|
पक्के इरादे वाले नेता हैं गॉर्डन ब्राउन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ऐसे नेता कम ही देखने को मिलते हैं जिनका व्यक्तित्व गॉर्डन ब्राउन की तरह अबूझ पहेली जैसा रहा हो. गॉर्डन ब्राउन की असाधारण प्रतिभा और पक्के इरादे पर कभी किसी को शक नहीं रहा और अब उनकी ये विशेषताएँ ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री के रूप में देखने को मिलेंगी जब वह बुधवार, 27 जून 2007 को यह ज़िम्मेदारी संभाल रहे हैं. पिछली क़रीब दो शताब्दियों में गॉर्डन ब्राउन ऐसे एकमात्र नेता रहे हैं जिन्होंने क़रीब एक दशक तक देश की अर्थव्यवस्था की ज़िम्मेदारी संभाले रखी. पिछले क़रीब एक दशक से टोनी ब्लयेर प्रधानमंत्री रहे और लगभग इतने ही समय से ब्राउन देश के वित्त मंत्रालय के प्रभारी रहे हैं. अब बड़ा सवाल ये है कि प्रधानमंत्री के रूप में गॉर्डन ब्राउन कैसे नेता साबित होंगे. गॉर्डन ब्राउन के व्यक्तित्व के बारे में दो नज़रिए प्रमुख रहे हैं. एक नज़रिए के मुताबिक वह ऐसे नेता हैं जिनका इरादा बहुत पक्का है और दूसरे नज़रिया ये है कि ब्राउन में कभी-कभी कुछ सनक भी नज़र आती है जो किसी नेता के लिए अच्छा नहीं है.
गॉर्डन ब्राउन विवाहित हैं और उनके दो बेटे हैं. ब्राउन का जन्म 20 फ़रवरी 1951 को स्कॉटलैंड में हुआ था. वह कुछ समय के लिए ग्लासगो में लैक्चरर और टीवी पत्रकार भी रहे हैं. 1983 में वह लेबर पार्टी के सांसद चुने गए. राजनीति के लिए ब्राउन की दिलचस्पी तभी पैदा हो गई थी जब वह स्कॉटलैंड में बच्चे थे और उनके राजनीतिक विचारों को दिशा उनके पिता से ही मिली. उनके पिता एक ईसाई पादरी थे. गॉर्डन ब्राउन जब किशोर ही थे तो लेबर पार्टी में शामिल हो गए थे. लेबर पार्टी की राजनीतिक विचारधारा मध्यवर्ती और वामपंथीं विचारों का मिश्रण रही है. गॉर्डन ब्राउन 1992 में विपक्षी लेबर पार्टी में वित्त मामलों के प्रभारी बनाए गए थे. उस समय कंज़रवेटिव पार्टी सत्ता में थी. सरकार में टोनी ब्लेयर सरकार के वित्त मंत्री के रूप में गॉर्डन ब्राउन के संबंध उनके साथ काफ़ी उतार-चढ़ाव वाले रहे हैं लेकिन अर्थव्यवस्था के प्रभारी के रूप में उनका रिकॉर्ड ख़ासा सफल कहा जाता है. जब भी लेबर पार्टी के नए स्वरूप का ज़िक्र होता रहा है तो टोनी ब्लेयर और गॉर्डन ब्राउन ही केंद्र में रहे हैं.
उन्होंने लेबर पार्टी की परंपरागत समाजवादी विचारधारा को पीछे छोड़ दिया और ऐसी विचारधारा को अपनाया जो मध्यमार्गी और वामपंथी विचारों का मिश्रण रही है. टोनी ब्लेयर और गॉर्डन ब्राउन के बीच मतभेद भी मीडिया में ख़ासी चर्चा में रहे और लेबर पार्टी के भीतर उनके समर्थकों में भी धड़े बन गए जिन्हें उनके नामों से जोड़कर देखा जाने लगा. अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर गॉर्डन ब्राउन ने ख़ासतौर से अफ्रीका में ग़रीबी समाप्त करने की ब्रिटेन के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. वित्त और अर्थव्यवस्थाओं से संबंधित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और बातचीत में गॉर्डन ब्राउन के काफ़ी प्रभावशाली विचार रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक कूटनीतिक की जैसे उन्हें आदत हो चुकी है. एक तरह से देखा जाए तो अनेक देशों के मंत्री गॉर्डन ब्राउन को पहले से ही जानते हैं और अब जब वह अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मंच पर ब्रिटेन के नेतृत्व करेंगे तो उन्हें काफ़ी सुविधा होगी. छवि गॉर्डन ब्राउन का राजनीतिक अनुभव उनके लिए नई ज़िम्मेदारी में मदद भी कर सकता है और बाधाएँ भी खड़ी कर सकता है क्योंकि वह ब्लेयर सरकार के एक सदस्य रहे हैं और ब्लेयर सरकार की नाकामियों में कुछ हिस्सा उनका भी रहा है.
दूसरी तरफ़ वह विपक्षी कंज़रवेटिव पार्टी के नेता डेविड कैमरून के कम राजनीतिक अनुभव के मुक़ाबले गॉर्डन ब्राउन की क़द काफ़ी उँचा बैठता है. यहाँ तक कि ख़ुद लेबर पार्टी में कुछ नेताओं की यह राय रही है कि डेविड कैमरून के सामने ब्राउन की छवि फीकी पड़ सकती है क्योंकि कैमरून ज़्यादा जोशीले नज़र आते हैं और मीडिया में भी उनकी अच्छी छवि है. बीबीसी के आर्थिक मामलों के संवाददाता एंड्रयू वॉकर गॉर्डन ब्राउन से अक्सर मिलते रहे हैं और वॉकर ने उनके व्यक्तित्व को नज़दीक से देखा है, "ऐसे भी मौक़े आए हैं जब गॉर्डन ब्राउन बहुत दबाव में रहे हैं और दबाव में उनका एक ख़ास तरह का व्यक्तित्व रहा है. मगर अक्सर मौक़ों पर वह काफ़ी सहज, दोस्ताना, खुली बात कहने वाले और मज़ाकिया भी रहे हैं." एंड्रयू वॉकर का कहना है कि जब वह देश के प्रधानमंत्री बन रहे हैं तो उन्हें अपने व्यक्तित्व का खुला पहलू आगे बढ़ाना होगा और मज़ाकिया अंदाज़ भी जारी रखना होगा. गॉर्डन ब्राउन की पहली प्राथमिकताओं में से एक ये होगी कि सरकार के बारे में नकारात्मक विचारों को बदलने की कोशिश करें.
इसका मतलब है कि ब्राउन को आम लोगों को यह भरोसा दिलाना होगा कि वह ब्लेयर सरकार के अच्छे कार्यों को जारी रखेंगे लेकिन साथ ही अतीत की जकड़ से भी ख़ुद को बाहर निकालेंगे. गॉर्डन ब्राउन को लोगों में अपनी छवि सुधारने के लिए भी काम करना होगा. उन्हें अक्सर सनकी और कभी-कभी स्टालिनवादी यानी तानाशाही रवैये वाला नेता भी कहा जाता है इसलिए ब्राउन को अपने साथ काम करने वाले लोगों को साथ लेकर चलन और उनकी सलाह की क़द्र करने की कोशिश करनी होगी. जब कोई नेता सरकार की ज़िम्मेदारी संभालता है तो ऐसे वादे करना आसान नज़र आता है लेकिन जब कठिन फ़ैसले लेने पड़ते हैं जिनसे लोगों के नाराज़ होने की आशंका होती है तो हालात बहुत मुश्किल भी हो जाते हैं. |
इससे जुड़ी ख़बरें कैसी होगी गॉर्डन ब्राउन की विदेश नीति?27 जून, 2007 | पहला पन्ना ब्लेयर को शांतिदूत बनाए जाने पर चर्चा26 जून, 2007 | पहला पन्ना लेबर पार्टी के नेता चुने गए ब्राउन24 जून, 2007 | पहला पन्ना गोर्डन ब्राउन ने अभियान शुरू किया11 मई, 2007 | पहला पन्ना 27 जून को प्रधानमंत्री पद छोड़ेंगे ब्लेयर10 मई, 2007 | पहला पन्ना ब्लेयर की तेज़ रफ़्तार तरक्की का सफ़र10 मई, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||