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कैसी होगी गॉर्डन ब्राउन की विदेश नीति? | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन की विदेश नीति के बारे में क्या सोच है, यह किसी को ठीक से पता नहीं. इतना ज़रूर है कि अमरीका की ओर उनका स्वाभाविक झुकाव है लेकिन वे अमरीकी राष्ट्रपति के उतने क़रीब नहीं जाएँगे जितना टोनी ब्लेयर बुश के क़रीब रहे. यूरोपीय संघ के प्रति उनका रवैया व्यावहारिक है, वे यूरोपीय एकता को लेकर भावुक क़तई नहीं हैं. उन्होंने अब तक इराक़, अफ़ग़ानिस्तान, कोसोवो और सियरा लियोन के मामले पर ब्लेयर की नीतियों का चुपचाप समर्थन किया है लेकिन आगे उनकी नीति वैसी ही होगी, ऐसा नहीं कहा जा सकता. वित्त मंत्री के रूप में वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ग़रीबी और कर्ज़ के ख़िलाफ़ मुहिम चलाने में दिलचस्पी लेते रहे हैं जो संभवतः आगे भी जारी रहेगा. अमरीका के साथ संबंध ऐसा माना जा रहा है कि वे मौजूदा अमरीकी राष्ट्रपति बुश से थोड़ी दूरी बनाना चाहेंगे लेकिन यहाँ समझना ज़रूरी है कि वे अमरीका-विरोधी नहीं हैं. अमरीका में उनकी गहरी दिलचस्पी रही है, वे अमरीकी इतिहास और राजनीति पर नज़र रखने वालों में से हैं.
कई अमरीकी राजनीतिक नेताओं से उनकी मित्रता है, ख़ास तौर मौजूदा विपक्षी दल डेमोक्रेटिक पार्टी में. जो लोग उनसे उम्मीद करते हैं कि वे अमरीका से बिल्कुल अलग जाकर अपनी विदेश नीति क़ायम करेंगे उन्हें निराशा ही होगी. सबकी नज़र इस बात पर टिकी है कि इराक़ पर उनका रुख़ क्या रहता है. इराक़ मामला इराक़ पर हमले के मामले में उन्होंने ब्लेयर का साथ दिया और वे उस पर क़ायम रहे, लेकिन उन्होंने संकेत दिया है कि वे स्थिति की समीक्षा करना चाहेंगे. वे इस मामले पर भी कोई निर्णय ले सकते हैं कि इराक़ में ब्रितानी सेना को कब तक रहना चाहिए. हाल ही में उन्होंने कहा था, "कैबिनेट का मंत्री होने के नाते हमने एक साझा फ़ैसला किया था जो हमारी नज़र में सही था लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है."
ब्लेयर कहते रहे हैं कि इराक़ में ब्रितानी सेना तब तक रहेगी जब तक कि वहाँ स्थिरता नहीं आ जाती. ब्राउन इस बारे में अब तक चुप हैं और वे स्थिरता की परिभाषा अपने हिसाब से तय कर सकते हैं. यही देखना होगा कि वे अमरीकी नेतृत्व से कितना अलग जाने के लिए तैयार हैं. उनके सैनिक मामलों के सलाहकार कौन होंगे और वे क्या सलाह देंगे इस पर भी बहुत कुछ निर्भर करेगा. अफ़ग़ानिस्तान अफ़ग़ानिस्तान में ब्रितानी सैनिक तालेबान के ख़िलाफ़ अतंरराष्ट्रीय गठबंधन सेना का हिस्सा हैं. अफ़ग़ानिस्तान में लगभग आठ हज़ार ब्रितानी सैनिक हैं. अफ़ग़ानिस्तान के मामले में नीति में कोई बड़ा परिवर्तन होगा इसकी संभावना कम ही है. अल क़ायदा और इस्लामी चरमपंथ के ख़िलाफ़ ब्राउन काफ़ी सख़्त माने जाते हैं, वे अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान और अल क़ायदा को दोबारा पैर न जमाने देने के पक्षधर हैं. अंतरराष्ट्रीय 'आतंकवाद' इस बात के कोई आसार नहीं है कि 'अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद' के ख़िलाफ़ गॉर्डन ब्राउन ब्लेयर के मुक़ाबले नरम होंगे. वे ब्रिटेन में आतंकवाद के ख़िलाफ़ सख़्त कानूनों के हिमायती रहे हैं, वे बार-बार कहते रहे हैं कि आतंकवाद देश के लिए एक बड़ा ख़तरा है. वित्त मंत्री के तौर पर भी उन्होंने चरमपंथी संगठनों के आर्थिक तंत्र को निशाना बनाया. पिछले वर्ष अपने एक भाषण में उन्होंने कहा, "अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का मुक़ाबला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होना चाहिए, सैनिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक हर मोर्चे पर." ईरान परमाणु गतिविधियों के मामले में ब्राउन ईरान के ख़िलाफ़ संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध के पक्षधर हैं. हाल ही में जब उनसे पूछा गया कि क्या वे ईरान पर किसी हमले की संभावना को पूरी तरह से नकार सकते हैं, इसके जवाब में उन्होंने कहा, "हम मामले का शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं."
यह जबाव मौजूदा ब्रितानी नीति के अनुरूप ही है, ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए सैनिक कार्रवाई के विकल्प को बंद नहीं करना. ब्राउन अच्छी तरह वाक़िफ़ हैं कि ईरान पर हमला कोई आसान विकल्प नहीं है, वे मामले को उस हद तक नहीं जाने देना चाहेंगे. मध्य-पूर्व ब्राउन ने मध्य-पूर्व समस्या में कभी उतनी रुचि नहीं दिखाई है जितनी कि ब्लेयर ने. ब्राउन सरकार से उम्मीद नहीं की जा रही है कि वे मध्य-पूर्व में कोई अहम भूमिका निभाएँगे, वे ब्रितानी सरकार की सीमाओं से अच्छी तरह परिचित हैं.
उन्होंने इसराइल में ब्रिटेन के राजदूत रहे साइमन मैकडॉनल्ड को अपना विदेश नीति सलाहकार बनाया है जिससे इसराइली ख़ुश हैं क्योंकि वे मैकडॉनल्ड को अपना दोस्त मानते हैं. माना जाता है कि ब्राउन की रुचि फ़लस्तीनी क्षेत्र के आर्थिक विकास में है, वे दो वर्ष पहले जब मध्य-पूर्व के दौरे पर गए थे तो तब उन्होंने वर्षों के अंतराल के बाद इसराइली और फ़लस्तीनी वित्त मंत्री आमने-सामने बिठाया था. जलवायु परिवर्तन ब्राउन ने वर्ष 2006 में जलवायु परिवर्तन पर एक विशेष अध्ययन करवाया जिसमें कहा गया कि इसके आर्थिक परिणाम काफ़ी गंभीर हो सकते हैं. उन्होंने इस रिपोर्ट को स्वीकार किया और उसकी सिफ़ारशों पर अमल कराने की कोशिश की.
उन्होंने हानिकारक गैसों के उत्सर्जन में कटौती के यूरोपीय संघ के लक्ष्यों का समर्थन किया. जलवायु परिवर्तन को लेकर उनका रवैया ब्लेयर की ही तरह गंभीर रहने वाला है. उन्होंने जलवायु परिवर्तन के मामले पर पूर्व अमरीकी उप राष्ट्रपति अल गोर को अपना सलाहकार बनाकर स्पष्ट कर दिया है कि इस मामले में अमरीकी सरकार से उनके मतभेद रहने वाले हैं. अंतरराष्ट्रीय सहायता गॉर्डन ब्राउन ने इस मामले में वित्त मंत्री के तौर पर अपनी छाप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छोड़ी है. उन्होंने अफ्रीकी देशों को कर्ज़ से राहत दिलाने का मुद्दा ज़ोर-शोर से उठाया. उन्होंने प्रस्ताव दिया है कि आर्थिक दृष्टि से कमज़ोर देशों की सहायता के लिए एक अलग कोष का गठन किया जाए. |
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