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प्राचीन अल-अस्करी मज़ार में विस्फोट | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में प्राचीन अल-अस्करी मज़ार में विस्फोट हुआ है और प्राप्त ख़बरों के अनुसार मज़ार की दोनों मीनारें ध्वस्त हो गई हैं. यह मज़ार शिया मुसलमानों के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है. ये मज़ार समारा में है जो इराक़ी राजधानी बग़दाद के उत्तर में स्थित है. स्थानीय समय के अनुसार सुबह नौ बजे दो धमाके हुए. धमाकों के बाद समारा में अनिश्चितकाल के लिए कर्फ़्यू लगा दिया गया है. जहाँ एक ओर अतिरिक्त पुलिस बल समारा पहुँचे हैं वहीं अमरीकी सुरक्षाकर्मी भी इस घटना की जाँच के लिए शहर में पहुँच गए हैं. अमरीका विरोधी शिया मौलवी मुक़्तदा अल-सद्र ने इस हमले के ख़िलाफ़ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों का आहवान किया है. उधर इस घटना के कुछ ही समय बाद इराक़ की सरकार ने राजधानी बग़दाद में स्थानीय समयानुसार तीन बजे से अनिश्चितकाल के लिए कर्फ़्यू लगाने की घोषणा की है. पहले भी हुआ हमला
समारा में दो शिया इमामों के मक़बरे हैं और उनमें से एक यहीं है और वहाँ दुनिया भर से लोग तीर्थयात्रा पर आते हैं. इसी दरगाह के गुंबद पर वर्ष 2006 में हमला किया गया था और समझा जाता है कि इसी के बाद से इराक़ में शिया-सुन्नी के बीच संघर्ष की शुरुआत हुई. इराक़ में शिया मज़ारों की ज़िम्मेदारी संभालने वाले एक मौलवी कहा है कि यह हमला 'आतंकवादियों' ने किया है. शेख़ सालेह अल-हैदरी ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा, "यह एक आतंकवादी हमला है जिसका उद्देश्य पहले से भड़की जातीय-हिंसा को हवा देना है." वैसे समारा आमतौर पर सुन्नी मुसलमानों का गढ़ है और यहाँ अमरीकी फ़ौजों के ख़िलाफ़ हथियारबंद विद्रोह होता रहा है. अल-अस्करी मज़ार इमाम अली अल-हादी मक़बरे का हिस्सा है, जहाँ दसवें और ग्यारहवें इमाम के अवशेष रखे हुए हैं. इन इमामों को मोहम्मद पैगम्बर के शिष्यों में से माना जाता है. इमाम अली हादी की मृत्यु 686 ईस्वी में हुई थी जबकि उनके बेटे हसन अल-अस्करी की मृत्यु 874 ईस्वी में हुई थी. इसी समारा शहर में सुन्नियों के एक प्रमुख मज़ार को वर्ष 2003 में एक विस्फोट से बड़ा नुक़सान हुआ था. |
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