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अस्करी मज़ार पर हमले का भारी विरोध | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में शिया समुदाय के सबसे पावन स्थलों में से एक अल अस्करी मज़ार पर हुए बम हमले के बाद पूरे इराक़ में ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शन हुए हैं. बताया जा रहा है कि बदला लेने के लिए सुन्नी समुदाय की कई मस्जिदों को निशाना बनाया गया है. हालाँकि अभी तक किसी ने भी इस हमले की ज़िम्मेदारी स्वीकार नहीं की है लेकिन इराक़ी टेलीविज़न पर बताया गया है कि कई लोगों को इस सिलसिले में गिरफ़्तार किया गया है. बुधवार को एक बम विस्फोट में अल अस्करी मज़ार को भारी नुक़सान पहुँचा था और उसका प्रमुख गुंबद पूरी तरह तबाह हो गया. कहा जा रहा है कि दो लोगों ने तड़के इस मज़ार पर हमला किया और इसे नुक़सान पहुँचाया. विरोध और शोक इस हमले के विरोध में हज़ारों लोग समारा स्थित इस मज़ार के बाहर इकट्ठा हो गए. बग़दाद में भी लोग विरोध जताने के लिए जमा हुए. इराक़ के शिया मुसलमानों के आध्यात्मिक नेता अली अल सिस्तानी ने एक सप्ताह के शोक का आह्वान किया है. बग़दाद में बीबीसी के जॉन ब्रेन का कहना है कि निश्चित तौर पर इस हमले का मक़सद बहुसंख्यक शियाओं और अल्पसंख्यक सुन्नी समुदाय के बीच के तनाव को और हवा देना था. अभी तक मिली रिपोर्टों में किसी के घायल होने की ख़बरें नहीं हैं लेकिन कुछ लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका ज़ाहिर की जा रही है. इराक़ के प्रधानमंत्री इब्राहिम जाफ़री ने टेलीवीज़न पर एक सीधे प्रसारण में हिस्सा लेकर तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की. इब्राहिम जाफ़री ने लोगों से कहा, "जो लोग राष्ट्रीय एकता को ख़तरे में डालना चाहते हैं उनके लिए सभी रास्ते बंद कर दिए जाएँ." इराक़ के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मुवक़्क़फ़ अल रुबाई ने हमले के लिए सुन्नी चरमपंथियों को दोषी ठहराया है. इब्राहिम जाफ़री और इराक़ के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार दोनों शिया हैं. पवित्र स्थल समारा सुन्नी बहुल इलाक़ा है और अमरीकी सैनिकों और स्थानीय प्रशासन के ख़िलाफ़ यहाँ कई बार हमले हो चुके हैं. अल अस्करी मज़ार इमाम अली हादी मक़बरे का एक हिस्सा है और उसे सभी मुसलमान पवित्र मानते हैं लेकिन शिया मुस्लिमों के लिए तो इसकी ख़ास अहमियत है. इस मज़ार में दसवें और ग्यारहवें इमामों का मक़बरा है जिन्हें पैगंबर मोहम्मद का वंशज माना जाता है. दुनिया भर से श्रद्धालु यहाँ आते हैं. ये मज़ार बग़दाद से करीब 100 कीलोमीटर की दूरी पर है. अभी तक किसी गुट ने इस हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है. समारा की सुन्नी मस्जिद का गुंबद भी 2003 में हुए हमले में क्षतिग्रस्त हो गया था. बुधवार को हुआ हमला ब्रितानी विदेशमंत्री जैक स्ट्रॉ की बग़दाद यात्रा के एक दिन बाद हुआ है. अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने इराक़ के जातीय गुटों से अपने मतभेद भुला कर एक नई राष्ट्रीय सरकार के गठन का आग्रह किया था. |
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