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रविवार, 27 मई, 2007 को 21:21 GMT तक के समाचार
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इराक़ को लेकर ईरान-अमरीका वार्ता
ईरान और अमरीका के राजदूत
इराक़ में अमरीकी राजदूत रायन क्रॉकर और ईरानी राजदूत हसन काज़मी
इराक़ में क़ानून व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा और भविष्य की योजनाओं को लेकर ईरान और अमरीका के बीच ऐतिहासिक वार्ता होने जा रही है.

सोमवार को होने जा रही इस वार्ता के लिए ईरान के प्रतिनिधि बग़दाद पहुँच चुके हैं.

यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब ईरान ने अमरीका पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि वह ईरान में जासूसी कर रहा है.

और इस समय ईरान इतना अलग-थलग पड़ा हुआ है जितना वह पहले कभी नहीं रहा.

तीन दशक बाद

ईरान-अमरीका वार्ता को इन मायनों में ऐतिहासिक कहा जा सकता है कि दोनों देश कोई तीन दशक बाद आपस में किसी विषय पर चर्चा करने जा रहे हैं.

जैसा कि ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना ने कहा है इस वार्ता में इराक़ की सुरक्षा व्यवस्था का मसला अहम रहेगा.

एजेंसी का कहना है कि इराक़ से अमरीकी फ़ौजों की वापसी के कार्यक्रम पर और इराक़ के पुनर्निर्माण में ईरान की भूमिका पर चर्चा होगी.

ईरानी राष्ट्रपति अहमदीनेजाद एक परमाणु संयंत्र में
ईरान के परमाणु कार्यक्रम के कारण संयुक्त राष्ट्र ने आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं

इसके अलावा ईरान के विपक्षी गुट पीपुल्स मुजाहिदीन की इराक़ में उपस्थिति पर भी चर्चा होगी.

दोनों देशों के राजदूत अपने प्रतिनिधि मंडलों के साथ इस बैठक में भाग लेंगे.

हालांकि बैठक का मुद्दा इराक़ ही होगा लेकिन कई विश्लेषकों का कहना है कि इससे यह साफ़ हो जाएगा कि दोनों के बीच बातचीत संभव है.

विरोध

बीबीसी के ईरानी मामलों के विश्लेषक सादिक़ सबा का कहना है कि वार्ता का फ़ैसला दोनों देशों के लिए आसान नहीं रहा है क्योंकि इसके लिए दोनों देशों को अपनी घोषित नीतियाँ बदलनी पड़ी हैं.

उनका कहना है कि ईरान के कट्टरपंथी कहते हैं कि अमरीका के साथ वार्ता करना वैसा ही जैसा कि भेड़िए के साथ नाचना या फिर शैतान से हाथ मिलाना.

लेकिन ईरान के नेतृत्व को लगता है कि अमरीका से सीधी बात करना ऐसे समय में अच्छा ही है जब अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बहुत ज़्यादा है.

अमरीकी प्रशासन ने अनिच्छा पूर्वक इस वार्ता के लिए हामी भरी है. इस उम्मीद के साथ कि शायद इससे इराक़ में शांति-व्यवस्था क़ायम करने में सफलता मिले.

विश्लेषकों का कहना है कि इस बात की संभावना बेहद कम है कि इस वार्ता से कोई नतीजा निकलेगा क्योंकि इराक़ की समस्या इतनी गहरी है कि ईरान उसका आसानी से उसका कोई हल सुझा भी नहीं सकता.

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