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जर्मनी में मोटापे के ख़िलाफ़ जंग | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जर्मनी को यूरोप का सबसे 'मोटा देश' घोषित किए जाने के बाद जर्मनी में मोटापे के ख़िलाफ़ देशव्यापी जंग छिड़ गई है. लोग परेशान हैं, सरकार चिंतित और खाद्य जगत आशंकित. दरअसल, 'इंटरनेशनल एसोसिएशन फ़ॉर स्टडी ऑफ़ ओबेसिटी' यानि मोटापे के अध्ययन के लिए अंतरराष्ट्रीय संघ की ताज़ा रिपोर्ट आने के पहले तक जर्मनी में मोटापे को इतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता था. मोटापे की सूची में ब्रिटेन दूसरे स्थान पर है, जबकि सबसे छरहरी काया इटली और फ्रांस के लोगों की पाई गई. अब तक जर्मनी की छवि खेल प्रेमी और स्वास्थ्य सजग देश की थी, लेकिन लगता है कि ये अब इतिहास की बात हो जाएगी. इस रिपोर्ट के अनुसार पूरे यूरोप में सबसे अधिक मोटे लोग जर्मनी में हैं. पाया गया है कि लगभग 60 प्रतिशत महिलाएँ और 75 प्रतिशत पुरुष मोटापे के शिकार हैं. जर्मनी में क़रीब पौने चार करोड़ वयस्क और 20 लाख बच्चों का वज़न सामान्य से ज़्यादा है. जर्मनी के लिए ये प्रतिष्ठा का विषय बन गया है. छवि के साथ-साथ मोटापे की ये मार जर्मन स्वास्थ्य प्रणाली पर भी पड़ रही है. अतिरिक्त कर लगाने की योजना स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार मोटापे की वज़ह से मधुमेह और हृदयरोग जैसी बीमारियाँ बढ़ रही हैं. इनके उपचार पर सालाना क़रीब एक सौ अरब डॉलर की अतिरिक्त रकम ख़र्च हो रही है, जो कि स्वास्थ्य पर होने वाले कुल ख़र्च का 30 प्रतिशत है. जर्मन सरकार का मानना है कि जनस्वास्थ्य और पोषण के लिहाज़ से मोटापा और उससे होने वाली बीमारियों का उन्मूलन आने वाले वर्षों में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है. मोटापे को कम करने के लिए 'फ़ैट की बजाय फ़िट' की पांच सूत्री कार्य योजना शुरू की गई है. अब उन खाद्य पदार्थों पर भी अतिरिक्त कर लगाने की तैयारी है जिनसे चर्बी बढ़ती है. उद्देश्य ये है कि हैमबर्गर, चीज़, बर्गर, बेकन और आइसक्रीम, चॉकलेट और शीतल पेय इतने मंहगे हो जाएँ कि लोग उन्हें कम खाएं. इसके अलावा इन्हें बनाने वाली कंपनियों से ये अपील की गई है कि वे स्वैच्छिक रूप से अपने उत्पादों में चर्बी की मात्रा कम कर दें. नियमित व्यायाम और संतुलित भोजन पर ज़ोर देने वाली इस पाँच सूत्री योजना के उदघाटन के मौके पर जर्मनी के खाद्य और उपभोक्ता सुरक्षा मंत्री होर्स्ट जी होफ़र ने कहा,"अधिकांश जर्मन जानते हैं कि स्वस्थ जीवनशैली क्या होती है, लेकिन वो इसका सख़्ती से पालन नहीं करते है. इसलिए हमें एक योजना की ज़रूरत है ताकि सभी इसे अपनाएँ." उपभोक्ता मंत्रालय की वेबसाइट में नागरिकों को आगाह किया गया है कि वो प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ खाने के पहले उसकी सामग्री और उसमें बसा की मात्रा का विवरण अच्छी तरह से पढ़ लें. जर्मनी के शहर बॉन में चिकित्सक डॉक्टर बूस का कहना है कि, "मोटापा यहाँ एक महामारी की शक्ल ले रहा है. इसका कारण है बीयर और चिकनाईवाले व्यंजनों का अधिक से अधिक सेवन और कम से कम शारीरिक श्रम." उनके अनुसार चिंता की बात ये है कि मोटापे की दर बच्चों में भी काफी अधिक है. इसका मतलब है हमारा भविष्य न केवल मोटा होगा बल्कि बीमार भी. लोगों में चिंता इन हालात में जर्मनी की मोटापा विरोधी लॉबी ने 'जंक फ़ूड' पर नियंत्रण लगाने की माँग नए सिरे से शुरू कर दी है. इसकी एक सदस्य मैथिड केरस्टिंग का कहना है, "स्कूलों में भी बच्चों को ताज़ा भोजन दिया जाए और उन्हें पोषण के ज्ञान के साथ-साथ खाना बनाने का भी प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए." मोटापे से परेशान स्वेन जिनका खुद का वजन 123 किलो है, कहते हैं, "मैं नहीं मानता कि कोई खाना बुरा होता है. बुरी है हमारी आदतें. मैं चाहता हूँ कि बर्गर और बीयर कम कर दूँ, लेकिन खुद पर काबू ही नहीं है." कुछ ऐसी ही राय तीन पोते-पोतियों की दादी आमी फ़िशर की भी है. वो कहती हैं, "ये तो होना ही था सुविधाओं और तकनीक ने लोगों को आरामतलब बना दिया है. लोग घर में खाना नहीं बनाते और सबकी जीभ को फ़ास्ट फ़ूड का चस्का लग गया है." उधर, फ़ास्ट फ़ूड, चॉकलेट और शीतल पेय बनाने वाली कंपनियां आशंकित हैं कि वज़न के प्रति अधिक सजगता की इस मुहिम का असर कहीं उनके कारोबार पर न पड़े. इसलिए मैक्डोनल्ड जैसी फ़ूड चेन ने पहले से ही अपने मेन्यू में 'लो कैलोरी' सलाद की कई किस्में पेश करनी शुरू कर दी हैं. |
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