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मंगलवार, 27 मार्च, 2007 को 05:27 GMT तक के समाचार
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ऑस्ट्रेलियाई क़ैदी ने आरोपों को माना
डेविड हिक्स
डेविड हिक्स पिछले पाँच वर्षों से बंधक शिविर में हैं
अमरीका के ग्वांतानामो जेल में एक ऑस्ट्रेलियाई क़ैदी डेविड हिक्स ने अपने खिलाफ़ लगाए गए आरोप स्वीकार कर लिए हैं.

अमरीकी सुप्रीम कोर्ट के नए निर्देशों के बाद डेविड हिक्स पहले बंधक हैं जिनकी सुनवाई अमरीकी सैन्य न्यायाधिकरण के समक्ष की गई.

डेविड हिक्स पर आरोप था कि उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान और अल-क़ायदा की चरमपंथी गतिविधियों में सहयोग दिया था.

डेविड ने अपने मामले को क्यूबा स्थित अमरीकी नौसैनिक अड्डे के सैन्य न्यायाधिकरण के समक्ष पेश किया था.

पिछले दिनों अमरीकी सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश जारी करते हुए बंधकों के मामलों की सुनवाई के लिए नए निर्देश जारी किए थे.

अदालत ने अपने फ़ैसले में पहले से क़ायम व्यवस्था को असंवैधानिक करार दिया था. इसके बाद राष्ट्रपति बुश की ओर इस संदर्भ में एक नया मसौदा संसद के समक्ष पेश किया गया था जिसे मंज़ूरी दे दी गई थी.

सुनवाई

हिक्स पिछले पाँच वर्षों से बंदी शिविर में रह रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री एलेक्ज़ेंडर डाउनर ने कहा कि अब डेविड को सज़ा काटने के लिए ऑस्ट्रेलिया की किसी जेल में भेजा जा सकता है.

इस्लाम अपना चुके 31 वर्षीय डेविड जब न्यायाधिकरण के सामने पेश हुए तो उनके बाल सीने तक लंबे थे.

ग्वांतानामो जेल
ग्वांतानामो में बधकों की स्थिति पर मानवाधिकार संगठन आपत्ति करते रहे हैं

डेविड के वकील ने बताया कि उन्होंने अपने बालों को इसलिए बढ़ाया है ताकि रात के वक्त उनके सेल में आने वाली तेज़ रोशनी से वो अपना बचाव कर सकें.

डेविड इन लंबे बालों से रोशनी से बच पाते थे और इस तरह उन्हें सो पाने में मदद मिलती थी.

सुनवाई से पहले डेविड को अपने पिता और बहन से बातचीत करने के लिए दो घंटे का समय दिया गया था.

विरोध

हालांकि मानवाधिकार संगठन इस नई व्यवस्था का विरोध कर रहे हैं.

मानवाधिकार समूह एमनेस्टी इंटरनेशनल इस बारे में लगातार माँग करता रहा है कि किसी विशेष दायरे में इन बंधकों के ख़िलाफ़ सुनवाई के बजाए ऐसा आम लोगों के लिए तय अमरीकी न्याय व्यवस्था के तहत ही किया जाना चाहिए.

ग्वांतानामो बे के क़ैदियों के संदर्भ में अपील अदालत ने पिछले महीने ही साफ कह दिया था कि इस बात का फैसला नागरिक अदालतें कर पाने में सक्षम नहीं हैं कि बंधकों की गिरफ़्तारी वैधानिक है या नहीं.

साथ ही यह भी कहा गया कि कि सैनिक कार्रवाइयों के तौर पर हुई गिरफ़्तारियों की वैधानिकता को चुनौती देने का अधिकार नागरिक अदालतों को नहीं है.

ग़ौरतलब है कि ग्वांतानामो बे में बंदी बनाकर रखे गए लोगों के संदर्भ में मानवाधिकार संगठन बार-बार सवाल उठाते रहे हैं.

इन जेलों में क़ैद लोगों को प्रताड़ित करने की भी ख़बरें सामने आती रही हैं जिसकी वजह से अमरीका को निंदा का भी सामना करना पड़ा है.

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