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रविवार, 18 फ़रवरी, 2007 को 04:05 GMT तक के समाचार
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त्रिपक्षीय वार्ताओं के लिए राइस इसराइल में
राइस और लिवनी
ऱाइस ने इसराइली विदेश मंत्री लिवनी से वार्ताएं की हैं
इसराइल और फ़लस्तीनी प्रशासन के बीच रुकी पड़ी शांति वार्ताओं को एक बार फिर शुरु करने के लिए अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीसा राइस इसराइल पहुंची हैं.

कोंडोलीसा ने इसराइल के विदेश मंत्री ज़िपी लिवनी के साथ वार्ता की है और रविवार को ही उनकी मुलाक़ात प्रधानमंत्री एहुद ओल्मर्ट से भी होनी है.

राइस ने अपनी यात्रा के दौरान कहा है कि अब समय आ गया है कि इसराइल के साथ एक फ़लस्तीनी राष्ट्र के सपने को आगे बढ़ाया जाए. उन्होंने कहा ' यह एक महत्वपूर्ण समय है यह बात करने का कि दो राष्ट्र एक दूसरे के साथ शांति और खुशहाली से कैसे रहें.'

हालांकि आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं कि इसराइल के प्रति फ़लस्तीनी सरकार का रवैया इस पूरी प्रक्रिया में बाधा डाल सकता है.

सोमवार से कोंडोलीसा राइस, इसराइल के प्रधानमंत्री एहुद ओल्मर्ट और फ़लस्तीनी प्राधिकरण के प्रमुख महमूद अब्बास के बीच वार्ता शुरु हो रही है.

 अगर कोई इसराइल आने के लिए अच्छे समय का इंतज़ार करे तो उसे आना ही नहीं चाहिए
कोंडोलीसा राइस

यरुशलम में बीबीसी संवाददाता बेथनी बेल के अनुसार प्रेक्षक मानते हैं कि ओल्मर्ट और अब्बास जैसे बड़े नेता शांति प्रक्रिया ऐसे क़दम उठा सकते हैं जो शांति प्रक्रिया को आगे न बढ़ने दे.

उदारता की अपील

इराक़ की राजधानी बग़दाद के औचक निरीक्षण के बाद इसराइल पहुंची राइस का कहना था कि फ़लस्तीनी पक्ष के उदारवादी लोगों को भी ये समझना होगा कि हिंसा का त्याग कर के ही आगे का रास्ता तय किया जा सकता है.

इस्माइल हानिया और महमूद अब्बास
हानिया और अब्बास जैसे फ़लस्तीनी नेता बड़े फ़ैसले कर सकते हैं

उन्होंने कहा कि अमरीका एक फ़लस्तीनी सरकार के निर्माण का इंतज़ार कर रहा है और उसके बाद ही कोई बड़ा फ़ैसला लिया जाएगा.

उन्होंने कहा ' अगर कोई इसराइल आने के लिए अच्छे समय का इंतज़ार करे तो उसे आना ही नहीं चाहिए.'

त्रिपक्षीय वार्ता से पहले राइस फ़लस्तीनी राष्ट्रपति अब्बास से भी मुलाक़ात करने वाली हैं.

गुरुवार को फ़लस्तीनी संगठन फ़तह के प्रमुख अब्बास ने पूर्व प्रधानमंत्री इस्माइल हानिया ने सरकार बनाने को कहा है.

पिछले महीने से अब तक हमास और फतह के बीच हिंसा में 90 से अधिक लोग मारे गए हैं.

उल्लेखनीय है कि फ़लस्तीनी संसद में हमास का वर्चस्व है और हमास इसराइल को देश के तौर पर मान्यता नहीं देता है.

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