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शुक्रवार, 09 फ़रवरी, 2007 को 13:31 GMT तक के समाचार
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यरूशलम के पवित्र परिसर में हिंसा
अल अक्सा मस्जिद
यह परिसर यहूदी और मुसलमान दोनों ही समुदायों के लिए बहुत पवित्र है
इसराइली पुलिस का कहना है कि उसने यरूशलम में पवित्र अल अक्सा मस्जिद में एकत्र कुछ प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस छोड़ी है और रबर की गोलियाँ चलाई हैं जिससे कुछ हिंसा होने की ख़बरें हैं.

ऐसी ख़बरें मिली हैं कि सैकड़ों फ़लस्तीनी प्रदर्शनकारी पुराने शहर में स्थित अल अक्सा मस्जिद के भीतर हैं और सैकड़ों इसराइली पुलिसकर्मी मस्जिद परिसर में घुस गए.

प्रदर्शनकारी फ़लस्तीनी टैम्पल माउंट में हो रहे विवादास्पद निर्माण कार्य पर क्रोधित हैं. मुसलमानों के लिए यह स्थल हरम अल शरीफ़ के रूप में जाना जाता है.

इस परिसर में एक नया रास्ता बनाने के लिए काम चर रहा है जो उस हिस्से तक जाएगा जहाँ मस्जिद स्थित है. अल अक्सा मस्जिद को इस्लाम की तीसरा सबसे बड़ा पवित्र स्थल माना जाता है.

फ़लस्तीनियों का कहना है कि इस निर्माण कार्य से परिसर की नींव कमज़ोर हो सकती है या उसे नुक़सान पहुँच सकता है और मुस्लिम नेताओं ने इस निर्माण कार्य पर अपना ग़ुस्सा जताने के लिए शुक्रवार को 'क्रोध दिवस' मनाने का आहवान किया था.

इसराइली अधिकारियों का कहना है कि इस प्राचीन स्थल का संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए यह निर्माण कार्य ज़रूरी है. अधिकारियों ने यह भी गारंटी दी है कि परिसर में किसी भी इमारत या ढाँचे को कोई नुक़सान नहीं होने दिया जाएगा.

यह परिसर यहूदियों के लिए भी बहुत पवित्र माना जाता है और अनेक यहूदी पूजा स्थल उस परिसर में हैं.

इसराइली अधिकारियों ने कहा है कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में 17 प्रदर्शनकारी और 15 पुलिसकर्मी ज़ख़्मी हुए हैं. इसराइल के पुलिस प्रवक्ता मिकी रोज़ेनफ़ेल्ड ने बीबीसी को बताया कि किसी भी तरह की गड़बड़ी फैलने से रोकने के लिए पुराने शहर में क़रीब ढाई हज़ार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं.

प्रवक्ता ने कहा, "स्थिति पर पुलिस का पूरी तरह नियंत्रण है. हमारे पुलिसकर्मी पूर्वी यरूशलम और टैम्पल माउंट में सभी इलाक़ों में तैनात हैं."

अल अक्सा मस्जिद में बंद प्रदर्शनकारियों में से एक शेख़ मोहम्मद हुसैन ने टेलीफ़ोन पर बीबीसी से बातचीत में बताया कि इसराइली सुरक्षा बलों ने परिसर की घेराबंदी कर दी है और किसी को भी बाहर नहीं जाने दिया जा रहा है.

शेख़ मोहम्मद हुसैन ने कहा, "हमें चारों ओर से घेर लिया गया है. घायल फ़लस्तीनियों को अस्पताल पहुँचाने के लिए एंबुलेंसों को भी अंदर नहीं आने दिया जा रहा है. कुछ चिकित्साकर्मियों ने घायलों को मदद की पेशकश की है."

यरूशलम में मौजूद बीबीसी संवाददाता मैथ्यू प्राइस का कहना है कि हालाँकि इस स्तर पर ये झड़पें मामूली लग रही हैं लेकिन यह स्थल इतना संवेदनशील है कि यहाँ से अन्य स्थानों पर भी बड़ी हिंसा भड़क सकती है.

यह परिसर तभी से बहुत संवेदनशील रहा है और वहाँ से हिंसा भी भड़कती रही है जब से 1967 के युद्ध के बाद इसराइल ने इस परिसर पर क़ब्ज़ा किया था.

1996 में इस परिसर के निकट एक सुरंग का दरवाज़ा इसराइल ने खोल दिया था जिसके बाद दंगे भड़क उठे थे और इसराइली सुरक्षा बलों और फ़लस्तीनी प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में 80 लोग मारे गए थे.

2000 में तत्कालीन विपक्षी नेता और बाद में प्रधानमंत्री बने अरियल शेरॉन ने इस स्थल का विवादास्पद दौरा किया था जिसके बाद फ़लस्तीनी विद्रोह शुरू हो गया था जिसे दूसरा इंतिफ़ादा नाम दिया गया था.

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