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बुश की इराक़ योजना का मुद्दा सीनेट में | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी संसद के निचले सदन में इराक़ योजना पर निंदा प्रस्ताव पारित होने के बाद अब सीनेट में भी इस पर मतविभाजन हो सकता है. इससे पहले निचले सदन हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव यानी प्रतिनिधि सभा ने शुक्रवार को राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के इराक़ में अतिरिक्त सैनिक भेजने की आलोचना का प्रस्ताव पारित किया. हालांकि सदन का फ़ैसला राष्ट्रपति बुश को बाध्य करनेवाला नहीं है. वाशिंगटन स्थित बीबीसी संवाददाता का कहना है कि राष्ट्रपति बुश की रिपब्लिकन पार्टी भरसक कोशिश करेगी कि सीनेट में इस प्रस्ताव पर मतविभाजन न होने पाए. हालाँकि इराक़ में तैनात अमरीकी सैनिकों के लिए ज़रुरी धनराशि मंजूर कराने के लिए बुश को अब संसद में लगातार विरोधों का सामना करना पड़ सकता है. प्रस्ताव में कहा गया है कि बुश प्रशासन की इराक़ नीति सही नहीं है और इससे मध्य पूर्व में हिंसा और बढ़ेगी. इस प्रस्ताव के पक्ष में 246 जबकि विपक्ष में 182 मत पड़े. उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति बुश की रिपब्लिकन पार्टी के 17 सदस्यों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया. व्हाइट हाउस ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रपति बुश व्यस्त थे इसलिए वे मतविभाजन को टीवी पर नहीं देख पाए. पिछले कुछ दिनों से अमरीकी प्रतिनिधि सभा में राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की इराक़ सुरक्षा योजना पर तीख़ी बहस हो रही थी और इस बहस के दौरान बुश प्रशासन की कड़ी आलोचना हुई. प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष और डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता नैन्सी पेलोसी राष्ट्रपति बुश की कटु आलोचक हैं. उनका कहना था, " इस मतदान से स्पष्ट हो गया है कि अब राष्ट्रपति बुश जो चाहें वह नहीं कर सकते हैं." दूसरी ओर रिपब्लिकन नेता जॉन बॉइनर ने चर्चा के दौरान चेतावनी दी कि अमरीकी नीति को कमज़ोर करने की कोशिशों से पूरी दुनिया में 'चरमपंथियों' का मनोबल बढ़ेगा. इराक़ को लेकर मुश्किलें बीबीसी संवाददाता का कहना है कि वॉशिंगटन में राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव नज़र आ रहा है.
लेकिन ये बदलाव कितना बड़ा और महत्वपूर्ण है ये तो अगले कुछ दिनो में ही पता चलेगा जब अमरीकी संसद में कुछ ख़ास मुद्दों पर मतदान होगा. ऐसा नहीं है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के सामने मुश्किलें नहीं हैं. दरअसल डेमोक्रेटिक पार्टी में भी दो धड़े बन गए हैं. पहला धड़ा उनका है जो युद्ध के ख़िलाफ़ है और इराक़ से जल्द सैनिकों की वापसी चाहता है. दूसरा मध्यमार्गियों का है जो जनता में ये संदेश नहीं देना चाहते हैं कि अमरीकी सेना की ताक़त में किसी भी तरह की कमी लाई जा रही है. लेकिन डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं का मानना है कि इराक़ मुद्दे पर अमरीकी जनता का समर्थन उनकी सबसे बड़ी ताक़त है. डेमोक्रेटिक पार्टी इराक़ युद्द के मुद्दे पर राष्ट्रपति बुश के लिए और चुनौतियाँ खड़ी करना चाहती है, ख़ासकर इस पर कि युद्द के लिए वित्तीय संसाधन कहाँ से जुटाए गए हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें बुश को डेमोक्रैटिक पार्टी की चेतावनी16 फ़रवरी, 2007 | पहला पन्ना इराक़ सुरक्षा योजना की कड़ी आलोचना14 फ़रवरी, 2007 | पहला पन्ना इराक़ी शरणार्थी योजना का स्वागत15 फ़रवरी, 2007 | पहला पन्ना इराक़ी शरणार्थियों को पनाह देगा अमरीका15 फ़रवरी, 2007 | पहला पन्ना बग़दाद के लिए नई सुरक्षा योजना 13 फ़रवरी, 2007 | पहला पन्ना बग़दाद में धमाके, 67 की मौत12 फ़रवरी, 2007 | पहला पन्ना 'शिया विद्रोहियों के समर्थन में ईरान'11 फ़रवरी, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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