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ईमानदारी की क़ीमत सौ डॉलर!

उसमान चौधरी
उसमान चौधरी
न्यूयॉर्क में बांग्लादेश मूल के एक टैक्सी चालक को ईमानदारी से लाखों डॉलर के हीरे लौटाने पर सिर्फ़ सौ डॉलर का ईनाम दिए जाने पर बवाल मचा हुआ है.

मामला कुछ यूं हुआ कि बांग्लादेशी मूल के एक टैक्सी चालक उसमान चौधरी ने सोमवार को एक महिला को एक होटल से अपनी टैक्सी में बिठाया और थोड़ी दूर एक रिहायशी इमारत के पते पर छोड़ दिया.

वह महिला उतरी और 10 डॉलर 70 सेंट के भाड़े पर उन्होंने 30 सेंट की टिप दी और चलती बनीं.

लेकिन वह अपना एक बैग टैक्सी की डिक्की में ही भूल गईं जिसमें लाखों डॉलर की क़ीमत की हीरे की अंगूठियाँ और एक लैपटॉप रखा हुआ था.

जब थोड़ी देर के बाद उसमान ने कुछ अन्य सवारियों का सामान रखने के लिए डिक्की खोली तो उन्हें यह बैग दिखा.

उन्होंने आव देखा न ताव, झट अपनी गाड़ी ख़ाली करवाई और पहुँचे उसी इमारत के पास जहाँ महिला सवारी उतरी थीं.

लेकिन रात के 11 बजे के समय उन्हें वहाँ कोई न दिखा.

उसमान ने टैक्सी चालकों की संस्था न्यूयॉर्क टैक्सी वर्कर्स एलायंस की निदेशक भैरवी देसाई को मदद के लिए फ़ोन किया.

संस्था के दफ़्तर पहुँचते ही दोनों ने बैग में कोई टेलीफ़ोन नंबर ढूंढने की कोशिश की और जब बैग की ज़िप खोली तो दोनों भौंचक्के रह गए.

बैग में तो बड़े करीने से सजाकर रखी गई हीरे की अंगूठियाँ दिखीं और साथ में एक लैपटॉप और कुछ दस्तावेज़. साथ ही टैक्सास का एक फ़ोन नंबर भी मिला.

उसी फ़ोन के सहारे टैक्सास के डेलेस शहर की उस महिला का पता चला जो असल में हीरों की व्यापारी हैं.

ईमानदारी की मिसाल

वो संस्था के दफ़्तर आईं और अपना बैग गले से लगाकर उसमान का बहुत शुक्रिया अदा किया. और उन्होंने ज़िद की कि वह उसमान को कुछ ईनाम देना चाहती हैं.

उसमान ने किसी प्रकार के ईनाम लेने से साफ़ इनकार कर दिया.

 मैने तो अपना फ़र्ज़ निभाया था. मैंने तो किसी ईनाम के बारे में सोचा तक नहीं था. मुझे कभी यह ख़याल भी नहीं आया कि उस बैग को अपने पास रख लूं. मैं कभी किसी दूसरे की चीज़ अपने पास नहीं रख सकता, यह मैंने कभी ज़िंदगी में नहीं किया
टैक्सी चालक उसमान चौधरी

बाद में उसमान बोले, '' मैने तो अपना फ़र्ज़ निभाया था. मैंने तो किसी ईनाम के बारे में सोचा तक नहीं था. मुझे कभी यह ख़याल भी नहीं आया कि उस बैग को अपने पास रख लूं. मैं कभी किसी दूसरे की चीज़ अपने पास नहीं रख सकता, यह मैंने कभी ज़िंदगी में नहीं किया.''

फिर उस महिला ने जो अपना नाम ज़ाहिर नहीं करना चाहती हैं, उसमान से कहा कि वो कुछ मुआवज़ा ही ले लें, क्योंकि उनका समय ख़राब हुआ है, तो उसमान मान गए.

ढ़ाई घंटे की दौड़ भाग का उन्होंने सौ डॉलर का पत्ता थमाया और चलती बनीं.

उसमान को तो ईनाम की कोई परवाह नहीं थी. लेकिन जब यह ख़बर आम हुई तो अमरीका भर के टीवी और समाचार पत्रों में यही कहा जाने लगा कि यह भी कोई ईनाम हुआ.

प्रशंसा के ईमेल

दुनिया भर से अब टैक्सी चालकों की संस्था न्यूयॉर्क टैक्सी वर्कर्स एलायंस के पते पर ईमेल के ज़रिए लोगों ने इस मामले में अपनी प्रशंसा और राय भेजनी भी शुरू कर दी है.

 देखिए, वैसे तो हर समाज, हर देश के लोगों में अच्छे और ईमानदार लोग होते हैं. लेकिन उसमान ने अपनी सच्चाई और ईमानदारी से हम सब बांग्लादेशियों का सर गर्व से ऊंचा कर दिया है
शफ़ाक आलम, पड़ोसी

कुछ का कहना है कि ऐसे ईमानदार लोगों का जितना भी सत्कार किया जाए कम है तो कुछ उस महिला व्यापारी की आलोचना कर रहे हैं जिन्होंने सौ डॉलर का इनाम माकूल समझा.

उसमान के आस पड़ोस में रहने वाले लोगों में और उनके टैक्सी चालक दोस्तों में तो इस ख़बर से ख़ुशी की लहर फैल गई कि उनके दोस्त और साथी ने ईमानदारी का लोहा मनवा दिया है.

बांग्लादेशी मूल के उनके पड़ोसी शफ़ाक आलम का कहना था,'' देखिए, वैसे तो हर समाज, हर देश के लोगों में अच्छे और ईमानदार लोग होते हैं. लेकिन उसमान ने अपनी सच्चाई और ईमानदारी से हम सब बांग्लादेशियों का सर गर्व से ऊंचा कर दिया है.''

अब शहर की सिटी काउंसिल ने उसमान को उनकी ईमानदारी पर सम्मानित भी किया है और उन्हें इनाम से नवाज़ा है.

शहर की टैक्सी कमीशन ने भी उन्हें सम्मानित करने के लिए एक विशेष सभा का आयोजन किया.

अब ख़बर यह भी गर्म है कि शहर के मेयर माइकल ब्लूंबर्ग भी उसमान को किसी प्रकार के ईनाम से सम्मानित करेंगे.

इक्तालीस वर्षीय उसमान के माता पिता का हाल ही में देहांत हो गया था. अब बांग्लादेश के घर में मौजूद अपने भाई बहनों को संभालना भी उन्हीं की ज़िम्मेदारी है.

गैर शादीशुदा उसमान रात भर बारह बारह घंटे टैक्सी चला कर अपने परिवार को संभाले हुए हैं.

उसमान का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि उनकी आने वाली पीढ़ी भी उनकी ईमानदारी से कुछ सीख लेंगी और उनका ही अनुसरण करेंगी.

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