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बुधवार, 29 नवंबर, 2006 को 03:23 GMT तक के समाचार
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अमरीकी मीडिया और बुश प्रशासन में ठनी
न्यूयॉर्क टाइम्स अख़बार
न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी इराक़ में चल रही लड़ाई को 'गृहयुद्ध' कहना का फ़ैसला किया है
अमरीका में व्हाइट हाऊस यानि राष्ट्रपति कार्यालय को चुनौती देते हुए अनेक मीडिया समूहों ने इराक़ में चल रही लड़ाई को गृहयुद्ध कहना शुरु कर दिया है.

अमरीका के एनबीसी मीडिया समूह के काफ़ी प्रचार के बाद उठाए गए इस कदम के उपरान्त जाने-माने अमरीकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी ऐसा करने का फ़ैसला किया है.

ग़ोरतलब है कि ये सब उस समय हो रहा है जब बुश प्रशासन लगातार कहता आ रहा है कि इराक़ में चल रही लड़ाई को गृहयुद्ध की संज्ञा देना अनुचित है.

वॉशिंगटन में बीबीसी संवाददाता जेम्स कुमारासामी का कहना है कि अमरीका की राजधानी वॉशिंगटन में इस मुद्दे पर विवाद छिड़ गया है.

गृहयुद्ध की परिभाषा

न्यायॉर्क टाइम्स का कहना है कि वह गृहयुद्ध शब्द का इस्तेमाल कर सकता है.

एक बयान में अख़बार के कार्यकारी संपादक बिल कैलर कहते हैं कि इस बात को तर्कसंगत ठहराना मुश्किल है कि इराक़ में चल रही लड़ाई गृहयुद्ध की आमतौर पर मान्य परिभाषा में ‘फ़िट’ नहीं बैठती.

लेकिन गृहयुद्ध की परिभाषा क्या है?

जेम्स कुमारासामी के अनुसार एनबीसी नेटवर्क ने सोमवार को राष्ट्रपति कार्यालय की आपत्ति को ख़ारिज करते हुए इस शब्द का इस्तेमाल करना नितिगत फ़ैसले लिया और अच्छा-ख़ासा विवाद छेड़ दिया.

राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्टीफ़न हैडली का कहना है कि इराक़ की सरकार इस स्थिति को इस तरह से नहीं देखती.

इराक़
इराक़ में पिछले हफ़्ते हुई हिंसा में दो सौ से ज़्यादा लोग मारे गए थे

उधर अमरीकी राष्ट्रपति ने ख़ुद इराक़ में हाल में हुए भीषण हमलों को अल-क़ायदा चरमपंथियों के जारी अभियान का हिस्सा बताया है.

गृहयुद्ध में तैनाती की इजाज़त

जिम्स कुमारासामी का कहना है कि जब हर रोज़ इतने लोगों को जान से हाथ धोना पड़ रहा हो तो वाजिब है कि इसका अमरीका में जनमत और अमरीकी नीति पर तो ज़रूर असर पड़ेगा.

रिपब्लिकन सीनेटर जॉन वॉरनर उन रिपब्लिकन नेताओं में सबसे आगे हैं जिनका सुझाव है कि यदि इराक़ में स्थिति गृहयुद्ध में तबदील हुई मानी जाए तो कांग्रेस यानि अमरीकी संसद को इराक़ में सेना तैनात करने की दोबारा इजाज़त लेनी होगी.

ऐसा इसलिए भी क्योंकि राष्ट्रपति बुश कहते आए हैं कि अमरीकी सेना का काम इराक़ में आपस में भिड़ते सांप्रदायिक गुटों के बीच तैनात रहना नहीं है.

बीबीसी संवाददाता जेम्स कुमारासामी कहते हैं कि यदि अमरीकी जनता ये मानने लगती है कि अमरीकी सेना असल में आपस में लड़ रहे सांप्रदायिक गुटों के बीच ही खड़ी है, तो सेना को इराक़ से वापस बुलाने का अमरीकी जनता का दबाव बढ़ जाएगा.

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