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'फाँसी नहीं टाली जाएगी' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक शीर्ष इराक़ी अधिकारी ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव में आकर सद्दाम हुसैन के सहयोगियों की फाँसी नहीं टाली जाएगी. प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी के प्रमुख सलाहकार समी अल अस्करी ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि इराक़ी क़ानून के तहत मौत की सज़ा को माफ़ नहीं किया जा सकता, यहाँ तक कि राष्ट्रपति के पास भी ऐसा अधिकार नहीं है. सद्दाम हुसैन के साथ ही दुजैल नरसंहार कांड में दोषी पाए गए बरज़ान इब्राहिम अल तिकरिती और अवाद अल बंदर को दोषी क़रार दिया गया था. इन दोनों लोगों की मौत की सज़ा की तारीख़ अभी तय नहीं की गई है. इराक़ी प्रधानमंत्री के सलाहकार का बयान ऐसे समय में आया है जबकि संयुक्त राष्ट्र ने अपील की है कि इन दोनों लोगों को फाँसी न दी जाए. बरज़ान अल तिकरिती सद्दाम हुसैन के सौतेले भाई हैं और उनके निकट सहयोगी रहे हैं. सद्दाम हुसैन को 30 दिसंबर को फाँसी दी जा चुकी है लेकिन तिकरिती और बंदार को उस दिन फाँसी नहीं दी गई थी. तीनों लोगों को दुजैल नरसंहार का दोषी पाया गया था. तिकरिती सद्दाम सरकार में ख़ुफ़िया विभाग के प्रमुख थे. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त लुईज़ आर्बर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत फाँसी की सज़ा को अपवाद के रूप में मान्यता मिली हुई है. उनका कहना है कि सद्दाम हुसैन के मुक़दमे की सुनवाई में निष्पक्षता से जुड़े मुद्दे को वो पहले उठा चुकी हैं और ये बाकी दो अभियुक्तों के लिए भी लागू होता है. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता के तहत इराक़ सरकार को तिकरिती और बंदार को फाँसी की सज़ा के खिलाफ़ क्षमादान याचिका देने का अवसर मिलना चाहिए. |
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