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'परमाणु एजेंसी से सहयोग पर पुनर्विचार' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान की संसद मजलिस ने ईरान पर लगाए गए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों को अन्यायपूर्ण और अवैध बताया है. ये प्रतिबंध ईरान के परमाणु कार्यक्रम के संदर्भ में लगाए गए हैं. भारी बहुमत से ईरान के सांसदों ने एक विधेयक पारित किया है जिसके तहत सरकार को आदेश दिया गया है कि वह अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ अपने सहयोग पर पुनर्विचार करे. ईरानी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद पहले ही सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव को ख़ारिज कर चुके हैं और उन्होंने कहा है कि पश्चिमी देशों को परमाणु सशक्त ईरान की आदत डालनी होगी. हालाँकि ईरान बार-बार कहता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण मकसदों के लिए ही है. राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने अपनी टिप्पणी में ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव को 'रद्दी का टुकड़ा' तक कहा था. उन्होंने ये भी कहा था कि संयुक्त राष्ट्र का क़दम ईरान को डराने के लिए उठाया गया है. ईरान ने अपने ऊपर लगाए गए प्रतिबंधों के जवाब में पहले ही कहा है कि वह अब जल्दी ही नतांज़ परमाणु संयंत्र में यूरेनियम संवर्धन शुरू कर देगा. महत्वपूर्ण है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अपने प्रस्ताव में ईरान से माँग की थी कि वह अपना यूरेनियम संवर्द्धन का कार्यक्रम बंद करे और परमाणु अप्रसार के बारे में अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभाए. | इससे जुड़ी ख़बरें सुरक्षा परिषद ने ईरान पर प्रतिबंध लगाए23 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना ईरान ने फ़ैसला अन्यायपूर्ण बताया23 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना ईरान के ख़िलाफ़ गठजोड़ का आह्वान20 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना अमरीका की सशर्त मदद को तैयार ईरान09 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नया प्रस्ताव08 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना ईरान मामले पर पेरिस में बैठक05 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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